जगदलपुर

Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ का ऐसा दुर्लभ पेड़ जो अंग्रेजों की आंखों में चुभता था, गुस्से में आकर बोले – नष्ट कर दो लेकिन…जानिए कहानी

Jagdalpur News: ब्रिटिश सरकार ने सतपूड़ा के जंगल में पाई जाने वाली औषधीय महत्व के दहमन पेड़ को जड़ से उखाड़ देने का हुक्म दिया था, इसका कारण इतना ही था कि इस पौधे के पत्ते का लेप गोंड व कोरकू आदिवासी लड़ाके युद्ध में लगे अपने घाव पर लगाते थे।

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Aug 01, 2024

Dahiman plant:Story By: अजय श्रीवास्तव: ब्रिटिश शासनकाल में सतपुड़ा के जंगल में ब्रिटिश सैनिकों से गोंड व कारकू जनजाति के लड़ाकों की भिड़ंत हो जाती थी। लड़ाई में घायल होेने के बावजूद इस जनजाति के लोग जंगल से मिली जड़ी बूटियों के उपयोग से अपने घाव को भर कर युद्ध के लिए फिर तैयार हो जाते थे। इससे परेशान ब्रिटिश सैनिकों ने जब स्थानीय लोगों से पूछताछ की तो पता चला कि दहिमन नाम के पौधे की पत्तियां इन लड़ाकों के लिए संजीवनी है, वे इससे अपनी चोट का उपचार कर लेते हैं।

इससे नाराज होकर अंग्रेजों ने एक पूरी रेजीमेंट को आदेश दिया कि सतपुड़ा के जंगल में जहां -जहां यह पौधा दिखे इसे समूल नष्ट कर दिया जाए। नतीजा यह हुआ कि दहिमन नाम के इस पौधे के अस्तित्व पर संकट आ गया। उसी कालखंड में कुछ जानकार इस पौधे को छिपाकर अन्य जगह पर ले गए और इसका रोपण कर इसे बचाने का प्रयास किया।

रक्त स्त्राव, सर्पदंश व नशा उतारने करते हैं उपचार

बस्तर के ग्रामीण इस पौधे को दहिमन, दहीपलाश व ढेंगन कहकर पहचानते हैं। वे पत्तों पर रेंगने वाली चीटियों को सूखाकर, भूनकर और चूर्ण बनाकर मिर्गी, माइग्रेन व सुरक्षित प्रसव के लिए उपयोग में लाते हैं। चोट को सूखाने के साथ ही सर्पदंश व नशा उतारने भी कारगर है। ग्रामीणों ने बताया कि जिस घर में शराब बन रही हो, उसकी छप्पर पर यदि इसकी डंगाल डाल दी जाए तो शराब नहीं पकती है। इसके अलावा इस पेड़ की छांव में बैठकर शराब पीने से नशा काफूर हो जाता है।

बॉयोसाइंस के प्रोफेसर्स ने खोज निकाला

जगदलपुर से सटे माचकोट रेंज के जंगल में बॉयोसाइंस के प्रोफेसर डॉ. एम.एल. नायक, पीजी कॉलेज के जूलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. सुशील दत्ता, डॉ. राजेंद्र सिंह व डॉ. पी. आर.एस. नेगी ने ग्रामीणों से इस पौधे के संबंध में सुना था। टीम ने अपने अनुसंधान के दौरान ब माचकोट के जंगल में दहिमन पौधे को खोज निकाला। वैज्ञानिकों ने बताया कि लगभग नष्ट होने के कगार पर इस पौधे के संरक्षण व संवर्धन के लिए वे प्रयास कर रहे हैं।

कार्डिया मेकलियोडी है इसका बॉटनिकल नाम

इस पौधे का बॉटनीकल नाम कार्डिया मेकलियोडी है। यह एंटी वेनम, एंटी ऑक्सीडेंट, एंटी बैक्टीरियल एंटी एलरगेसिक, एंटी ऑक्सीडेंट व एंटी माइक्रो बैक्टीरियल गुणों से भरपूर होता है। दहिमन की पत्तियां, छाल व जड़ का उपयोग कई तरह की बीमारियों में बेहद कारगर है।दहिमन के अनुसंधान में शामिल डॉ. सुशील दत्ता ने बताया कि माचकोट में इसका पाया जाना बेहद आश्चर्यजनक है। ऐसे पौधों को बचाना जरूरी है।

Updated on:
02 Aug 2024 09:38 am
Published on:
01 Aug 2024 10:38 am
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