Chhattisgarh Startup: बस्तर में ‘इनोवेशन महाकुंभ 1.0’ का शुभारंभ करते हुए राज्यपाल रमेन डेका ने इसे ट्राइबल इनोवेशन हब बनाने का आह्वान किया।
Chhattisgarh Startup: शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय ‘‘इनोवेशन महाकुंभ 1.0’’ का भव्य शुभारंभ राज्यपाल रमेन डेका के मुख्य आतिथ्य में हुआ। इस अवसर पर राज्यपाल ने बस्तर को ट्राइबल इनोवेशन हब के रूप में विकसित करने का आह्वान करते हुए कहा कि यह क्षेत्र अब चुनौतियों से निकलकर विकास, नवाचार और आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि बस्तर की पवित्र धरती प्राकृतिक संसाधनों, समृद्ध आदिवासी कला, संस्कृति और पर्यटन की अपार संभावनाओं से भरपूर है। उन्होंने कहा कि इन संसाधनों को नवाचार और उद्यमिता के साथ जोड़कर क्षेत्र को वैश्विक पहचान दिलाई जा सकती है। कार्यक्रम के माध्यम से बस्तर को नवाचार, उद्यमिता और आत्मनिर्भरता का केंद्र बनाने का सामूहिक संकल्प व्यक्त किया गया।
पर्यावरण संरक्षण और समावेशी विकास पर बल: राज्यपाल ने वनों, नदियों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को आवश्यक बताते हुए कहा कि पर्यावरण संतुलन के बिना विकास संभव नहीं है। उन्होंने समावेशी विकास की अवधारणा को अपनाने और स्थानीय संसाधनों का वैज्ञानिक उपयोग करने की आवश्यकता पर बल दिया।
शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय की सराहना करते हुए राज्यपाल ने कहा कि संस्थान द्वारा अपनाया गया ‘‘ज्ञान से व्यवसाय’’ मॉडल छात्रों को अपने विचारों को स्टार्टअप में बदलने का अवसर दे रहा है। यह पहल भविष्य में रोजगार के नए अवसर पैदा करेगी और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाएगी।
राज्यपाल ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि भारत विश्व के सबसे युवा देशों में से एक है, इसलिए युवाओं को नौकरी मांगने के बजाय नौकरी देने वाला बनने की दिशा में आगे बढऩा चाहिए। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप, उद्यमिता और नवाचार को अपनाकर ही आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उन्होंने ‘‘सीखो, लागू करो, नया सोचो, कमाओ’’ के मंत्र को अपनाने की अपील की और कहा कि शिक्षा अब केवल डिग्री तक सीमित नहीं रही, बल्कि कौशल विकास और रोजगार सृजन का माध्यम बन चुकी है, जैसा कि नई शिक्षा नीति 2020 में भी स्पष्ट किया गया है।
कार्यक्रम में सांसद महेश कश्यप, महापौर संजय पांडेय, बस्तर राजपरिवार के कमलचंद्र भंजदेव, एनईटीई चेयरमैन अनिल डी. सहस्रबुद्धे, कुलपति प्रो. मनोज कुमार श्रीवास्तव सहित अनेक विशेषज्ञ, प्रशासनिक अधिकारी, विश्वविद्यालयों के कुलपति, प्राध्यापक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और युवा उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि बस्तर की कला, संस्कृति, शिल्प और वनोपज को रोजगार से जोडऩा आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नवाचार के माध्यम से बस्तर को रोजगार देने वाले क्षेत्र के रूप में विकसित किया जा सकता है। इस अवसर पर राज्यपाल ने ‘‘इनोवेशन एंड स्टार्टअप कंपेडियम’’ पुस्तक का विमोचन किया और पद्मश्री बुधरी ताती को सम्मानित किया।
राज्यपाल ने कहा कि बस्तर में महुआ, इमली, तेंदूपत्ता, रेशम जैसे वन उत्पादों के साथ-साथ आदिवासी कला और हस्तशिल्प की बड़ी संभावनाएं हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि कच्चा माल बेचने के बजाय स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन किया जाए और इन उत्पादों को ब्रांड के रूप में विकसित कर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाया जाए। उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉम्र्स जैसे ई-कॉमर्स, सोशल मीडिया और मोबाइल एप्लिकेशन को स्थानीय उद्यमियों के लिए बड़ा अवसर बताते हुए कहा कि आज का मोबाइल फोन ही सबसे बड़ा बाजार बन चुका है, जिसका सही उपयोग युवाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बना सकता है।