जगदलपुर

Chhattisgarh Butterfly Species: तितलियों के रंगों से बदलेगी छत्तीसगढ़ की पहचान, राजकीय तितली चुनने की तैयारी शुरू

Chhattisgarh Wildlife: छत्तीसगढ़ में पहली राजकीय तितली चुनने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। वन विभाग ने कॉमन बैंडेड पीकॉक, ऑरेंज ओकलीफ और स्पॉट स्वॉर्डटेल को अंतिम सूची में रखा है।
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Chhattisgarh Butterfly Species
बटरफ्लाई स्टेट बनने की राह पर छत्तीसगढ़ (Photo Source- Patrika)

मनोज साहू/Chhattisgarh Butterfly Species: अब छत्तीसगढ़ की पहचान सिर्फ घने जंगल, वन्यजीव और आदिवासी संस्कृति से नहीं होगी। जंगलों के बीच रंग-बिरंगे पंखों के साथ उड़ती तितलियां भी प्रदेश की जैव विविधता की नई पहचान बन रही हैं। राज्य में 201 प्रजातियों की तितलियों का दस्तावेजीकरण हो चुका है। इनमें 19 प्रजातियां ऐसी हैं, जो प्रदेश में पहली बार दर्ज की गई हैं। 2019 से 2024 तक सभी 33 जिलों में हुए सर्वे के बाद सामने आई इस तस्वीर ने छत्तीसगढ़ के जंगलों में छिपी तितलियों की दुनिया को सामने ला दिया है।

अब राज्य अपनी पहली राजकीय तितली चुनने की तैयारी में है। वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने इसके लिए तीन प्रजातियों को अंतिम सूची में रखा है। इनमें कॉमन बैंडेड पीकॉक, ऑरेंज ओकलीफ और स्पॉट स्वॉर्डटेल शामिल हैं। चयन में इनकी उपलब्धता, पारिस्थितिक महत्व, संरक्षण मूल्य, विशिष्ट पहचान और लोगों के आकर्षण को आधार बनाया जाएगा।

Butterfly Conservation: बस्तर में तितलियों की अपनी अलग दुनिया

बस्तर की बात करें तो यहां की तस्वीर और भी दिलचस्प है। कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में 252 से अधिक तितली प्रजातियों की मौजूदगी दर्ज की गई है। जंगल, जलस्रोत, घासभूमि और अलग-अलग तरह की वनस्पतियां यहां तितलियों को अनुकूल वातावरण देती हैं। कांगेर घाटी के कुछ क्षेत्रों में एक ही स्थान पर 100 से अधिक प्रजातियां देखी जा सकती हैं। कॉमन जेम, ऑरेंज ओकलीफ, ब्लू टाइगर, प्लेन टाइगर और कॉमन मैप जैसी तितलियां यहां आकर्षण का केंद्र हैं। अक्टूबर से फरवरी के बीच इनकी गतिविधियां खास तौर पर देखने को मिलती हैं। यही वजह है कि कांगेर घाटी में तितली क्षेत्र प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों के लिए नया आकर्षण बन रहा है।

तितली के साथ बचेगा उसका जंगल

छत्तीसगढ़ में 201 तितली प्रजातियों का रिकॉर्ड तैयार हो चुका है और नए रिकॉर्ड सामने आने का सिलसिला जारी है। अकेले कांगेर घाटी में 252 से ज्यादा प्रजातियों की मौजूदगी बस्तर की जैव विविधता की समृद्ध तस्वीर दिखाती है। ऐसे में असली चुनौती सिर्फ एक तितली को राजकीय पहचान देने की नहीं, बल्कि उन जंगलों और प्राकृतिक आवासों को बचाने की है, जहां ये तितलियां अपनी उड़ान भरती हैं। अगर इनके आवास सुरक्षित रहे, तभी छत्तीसगढ़ के ‘बटरफ्लाई स्टेट’ बनने की उम्मीद भी मजबूत होगी।

आंकड़ों पर भी गौर करें

201 - प्रदेश में दर्ज तितली प्रजातियां
19 - सर्वे में पहली बार मिली प्रजातियां
33 - सर्वे में शामिल जिले
3 - राजकीय तितली की अंतिम सूची में प्रजातियां
2019-2024 - राज्यव्यापी सर्वे की अवधि
252 से अधिक - कांगेर घाटी में दर्ज प्रजातियां
100 से अधिक - कांगेर घाटी के एक क्षेत्र में मिलने वाली प्रजातियां

Bastar Biodiversity: पहले 182, सर्वे के बाद संख्या पहुंची 201

राज्य में पहले 182 तितली प्रजातियों का रिकॉर्ड उपलब्ध था। छह साल चले व्यापक सर्वे में 19 नई प्रजातियां जुडऩे के बाद यह संख्या 201 तक पहुंच गई। खास बात यह है कि सर्वे केवल मैदानी क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रदेश के सभी 33 जिलों में किया गया। इस अध्ययन में जगदलपुर से जुड़े शोधकर्ताओं और संस्थानों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

Updated on:
08 Oct 2026 03:23 pm
Published on:
08 Oct 2026 03:23 pm