
Electricity Workers Rescue: मूसलाधार बारिश और भीषण बाढ़ ने जिले में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया। कई मुख्य मार्ग, बस्तियां और निचले इलाके जलमग्न हो गए। बाढ़ का पानी अब धीरे-धीरे उतरने लगा है, लेकिन इस आपदा के दौरान विद्युत विभाग के कर्मचारियों ने जिस तरह मोर्चा संभाला, वह अलग से उल्लेखनीय रहा। जब लोग बाढ़ से बचने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर जा रहे थे।
तब विद्युतकर्मी अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना जलमग्न इलाकों में पहुंचकर बिजली व्यवस्था को सुरक्षित करने और फिर बहाल करने में जुटे रहे। पानी से भरे रास्तों, डूबे बिजली खंभों और जलमग्न ट्रांसफार्मरों के बीच कर्मचारियों ने दिन-रात काम किया। कहीं टूटे तारों को दुरुस्त किया गया तो कहीं क्षतिग्रस्त बिजली व्यवस्था की जांच की गई। उद्देश्य था कि पानी उतरने के बाद सुरक्षित तरीके से बिजली आपूर्ति जल्द शुरू की जा सके।
कर्मचारी जलमग्न ट्रांसफार्मरों का तकनीकी निरीक्षण कर रहे हैं। पानी में डूबे उपकरणों को सीधे चालू करने के बजाय उनकी सुरक्षा जांच की जा रही है, ताकि करंट फैलने या अन्य हादसे की आशंका न रहे। टूटे तारों और क्षतिग्रस्त खंभों की मरम्मत का काम भी जारी है।
बाढ़ से क्षतिग्रस्त या अत्यधिक गीले कच्चे मकानों में करंट से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए फिलहाल बिजली कनेक्शन काटे गए हैं। स्थिति सुरक्षित होने और तकनीकी जांच पूरी होने के बाद ही इन्हें दोबारा जोड़ा जाएगा। बाढ़ के बीच विद्युतकर्मियों की यह मुस्तैदी बताती है कि आपदा के समय जरूरी सेवाओं को बहाल रखना भी अपने आप में बड़ी चुनौती होती है। पानी के बीच लगातार काम कर कर्मचारियों ने प्रभावित इलाकों में बिजली व्यवस्था को सामान्य करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
विद्युत विभाग के अधिकारी प्रदीप अग्रवानी ने बताया कि बाढ़ के दौरान जनहानि रोकने और सुरक्षा को देखते हुए कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति अस्थायी रूप से बंद की गई थी। जैसे ही पानी का स्तर कम हुआ, कर्मचारियों ने राहत और मरम्मत कार्य शुरू कर दिया। उनके अनुसार कर्मचारियों की मेहनत से जिले के अधिकांश क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई है।