मिलावट रोकने के लिए सरकार ने भले ही कई कानून बनाएं रखे हो। लेकिन सुकमा जिले में खाद्य सामाग्रियों की तय मानक स्तर की भी जांच करने के लिए विभागीय अधिकारियों के पास वक्त नहीं है।
सुकमा. खाद्य पदार्थो में मिलावट रोकने के लिए सरकार ने भले ही कई कानून बनाएं रखे हो। लेकिन सुकमा जिले में खाद्य सामाग्रियों की तय मानक स्तर की भी जांच करने के लिए विभागीय अधिकारियों के पास वक्त नहीं है। कुछ दिन बाद दिवाली का पर्व है। इधर आम जनता त्योहार मनाने की तैयारी में जूट चूके है। अब तक होटलों में खाद्य सामाग्रियों की जांच पड़ताल नहीं किए जाने से आम जनता के बीच इस बात को लेकर चर्चा है। जिला मुख्यालय सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों में प्रदूषित खाद्य सामाग्री बड़े पैमाने पर खपत की जा रही हैं। इसका उपयोग सामाजिक कार्यक्रमों एवं दैनिक उपयोग में रोजाना हो रहा है। सुकमा शहर की होटलों में नमकीन एवं मिठाइयां रोजाना खपत हो रही है। लेकिन खाद्य नियमों का पालन नहीं किया जा रहा हैं। नमकीन मिठाई पैकेट डिब्बों में नहीं प्रोडक्शन में एक्सपायरी डेट अंकित नहीं होता हैं। उसके बाद भी खाद्य अफसरों के नाक के नीचे प्रदूषित सामान बेचा जा रहा हैं। अमानक समान सेहत के लिए खतरनाक साबित हो रही है।
नमकीन बनाने में शुद्ध सामग्रियों का उपयोग नहीं
बताया जा रहा हैं की शहर में बन रही नमकीन और मिठाइयों में शुद्ध बेसन का उपयोग नहीं हो रहा हैं। शुद्धता के नाम पर जो नमकीन मिल रही हैं उसमें पचास फीसदी चना दाल, बीस फीसदी तेवड़ा और दस फीसदी चावल इस प्रकार के मिश्रण से नमकीन तैयारी किया जाता है। साथ ही निम्न गुणवत्ता वाली खाद्य तेल का उपयोग किया जाता है। जो सेहत के लिए बहुत हानिकारक होती है।
धड़ल्ले से जारी है खरीदी बिक्री
जिले में मिलावटी और अमानक सामग्री की बिक्री को रोकने के लिए कोई जांच कमेटी तक अब तक जिले में बनी है। कमेटी नहीं होने से समय पर जांच की नहीं किए जाने से लोगों तक दूषित खाद्य सामान पहुंच रही हैं। मिठाई दुकानों में धड़ल्ले मिलावटी मिठाई बेची जा रही हैं। सालभर से एक बार भी खाद्द्य विभाग दुकानों में जांच पड़ताल नहीं पहुंचाता है। अफसरों की उदासीन रवैया के कारण मिलावट का खेल सालों से ऐसी चली आ रही है।
रंगीन मिठाइयों से बचें
अक्सर मिठाई बनाने में कई प्रकार के रंगों का उपयोग किया जाता है। ऐसे मिठाइयों खरीदने से बचना चाहिए। ताकि मिठाई में मिलाई गई। सेंथेटिक रंग के कारण खाने के बाद स्वाथ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। एक तहर से ऐसी मिठाईयां खरीदने से बचाना चाहिए।
यह है प्रावधान
खाद्य सुरक्षा एक्ट के अनुसार सैम्पल असुरक्षित मिलने पर मामला सीजेएम कोर्ट में जाता है। ऐसे मामले में छह महीने से आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है। वहीं सैम्पल अमानक मिलने पर मामला एडीएम कोर्ट में जाता है। जिसमें अधिकतम तीन लाख के जुर्माने का प्रावधान है।
60 दिन के बाद प्रदूषित हो जाती है सामग्री
नमकीन व्यापार से जुड़े लोगों के मुताबिक नमकीन पैकिंग से 60 दिन तक खराब नहीं होती हैं। 60 दिन के बाद प्रदूषित होने लगती हैं। पैकेट में पैकिंग डेट होनी चाहिए। नमकीन बनाने वाली जगह साफ -सफाई होना जरुरी हैं। पैकेट पैकिंग खुली हाथों से की जाती हैं जो सबसे ज्यादा नुकसानदायक हैं। अधिवक्ता कैलाश जैन ने बताया की कितनी कौनसी समाग्री मिलाई गई और कब पैकिंग हुई यह सब अंकित होना चाहिए। लायसेंस नंबर और निर्माता का पूरा पता अंकित होना चाहिए। ये सब नहीं होने के स्थिति में खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई हो सकती हैं।