
Jhiram Ghati Martyrs: झीरम घाटी शहीद स्मारक में अब बलिदानियों से जुड़ी जानकारी डिजिटल माध्यम से भी उपलब्ध होगी। स्मारक में आने वाले लोग मोबाइल फोन से क्यूआर कोड स्कैन कर संबंधित बलिदानी के बारे में विस्तृत जानकारी हासिल कर सकेंगे। इसके लिए प्रत्येक बलिदानी की नाम पट्टिका के पास अलग-अलग क्यूआर कोड लगाए गए हैं।
क्यूआर कोड स्कैन करने पर संबंधित बलिदानी का नाम और तस्वीर के साथ उनकी सेवा, बलिदान की तारीख तथा झीरम घटना से जुड़ी जानकारी मोबाइल स्क्रीन पर दिखाई देगी। इस पहल से स्मारक आने वाले लोगों को वहां अंकित नामों के बारे में विस्तार से जानने का अवसर मिलेगा।
स्मारक में केवल बलिदानियों की व्यक्तिगत जानकारी ही नहीं, बल्कि झीरम घटना से जुड़ी डिजिटल सामग्री भी उपलब्ध कराई गई है। मुख्य क्यूआर कोड को स्कैन करने पर झीरम घटना पर आधारित डॉक्यूमेंट्री देखी जा सकेगी। वहीं, अलग-अलग नाम पट्टिकाओं पर लगाए गए क्यूआर कोड के जरिए संबंधित बलिदानी की तस्वीर और उनके जीवन व बलिदान से जुड़ी जानकारी ऑडियो-वीडियो के माध्यम से भी देखी और सुनी जा सकेगी। इससे स्मारक आने वाले युवा और विद्यार्थी घटना को डिजिटल माध्यम से समझ सकेंगे।
झीरम घाटी में 25 मई 2013 को सुकमा से लौट रही कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर माओवादी हमला हुआ था। इस हमले में तत्कालीन पीसीसी अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके पुत्र दिनेश पटेल, पूर्व मंत्री महेंद्र कर्मा और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल समेत कांग्रेस के कई नेता, सुरक्षा बल के जवान और आम लोग बलिदान हुए थे। इस घटना में कुल 32 लोगों के बलिदान की जानकारी दी गई है।
बलिदानियों की स्मृति को बनाए रखने के लिए झीरम घाटी के अलावा जगदलपुर के लालबाग में भी स्मारक बनाए गए हैं। अब इन स्मारकों में डिजिटल माध्यम को जोड़कर लोगों को घटना और बलिदानियों की जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है।
अगस्त 2026 में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने शहीद स्मारक का दौरा किया था। इस दौरान स्मारक को अधिक स्मरणीय और प्रभावी बनाने की बात कही गई थी। इसके बाद प्रशासन की ओर से स्मारक के डिजिटलीकरण की दिशा में काम शुरू किया गया।
क्यूआर कोड की सुविधा शुरू होने से स्मारक में आने वाले पर्यटकों, स्कूली बच्चों और युवा पीढ़ी को झीरम घाटी की घटना और उसमें बलिदान हुए लोगों के बारे में जानकारी प्राप्त करने में आसानी होगी। मोबाइल के जरिए जानकारी उपलब्ध होने से स्मारक का इतिहास अब डिजिटल माध्यम से भी लोगों तक पहुंच सकेगा।