जगदलपुर

Magh Gupt Navratri : इस बार घोड़े पर सवार होकर आंएगी मां दुर्गा, दिख रहे अशुभ संकेत… इस मुहूर्त में विधि-विधान से करें पूजा

Magh Gupt Navratri : हिन्दु धर्म में मां दुर्गा की आराधना का विशेष महत्व है यही वजह है कि हिन्दू पंचांग में हर वर्ष 4 नवरात्रि का उल्लेख हैं।

2 min read
Jan 29, 2024

Magh Gupt Navratri : हिन्दु धर्म में मां दुर्गा की आराधना का विशेष महत्व है यही वजह है कि हिन्दू पंचांग में हर वर्ष 4 नवरात्रि का उल्लेख हैं। इनमें दो गुप्त नवरात्रि और दो प्रत्यक्ष नवरात्रि होती है। गुप्त नवरात्रि माघ और आषाढ़ महीने में होती है, जबकि चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि को प्रत्यक्ष नवरात्रि के रूप में मान्यता है। गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा की दस महाविद्या की पूजा-अर्चना की जाती है जो तंत्र साधना करने वालों के लिये अत्यंत शुभ माना गया है

तंत्र साधना सिद्धि का विशेष समय: गुप्त नवरात्रि मुख्य रूप से साधकों और अघोरियों के तंत्र-मंत्र की सिद्धि पाने का विशेष समय होता है। मान्यता है कि यह पूजा जितना गुप्त होगी उतनी ही जल्दी साधक की मनोकामना पूरी होती है।

माघ गुप्त नवरात्रि के पहले दिन मां काली, दूसरे दिन मां तारा, तीसरे दिन मां त्रिपुर सुंदरी, चौथे दिन मां भुवनेश्वरी, पांचवे दिन मां छिन्नमस्तिका, छठे दिन मां त्रिपुर भैरवी, सातवें दिन मां धूमावती, आठवें दिन मां बगलामुखी, नौवें दिन मां मातंगी और दसवें दिन मां कमला की पूजा होती है।

घोड़े पर होगा मातारानी का आगमनज्योतिष दिनेश दास का कहना है कि गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्याओं की पूजा-अर्चना गुप्त तरीके से की जाती है। इस बार माघ गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ शनिवार को हो रहा है जिसकी वजह से मातारानी का वाहन घोड़ा होगा। जबकि इसका विसर्जन रविवार के दिन होने के कारण मां दुर्गा भैसे पर सवार होकर प्रस्थान करेंगी।

माघ शुक्ल प्रतिपदा तिथि से माघ गुप्त नवरात्रि शुरू होती है। यह नवमी तिथि तक चलती है। पंचांग के अनुसार इस वर्ष माघ गुप्त नवरात्रि 10 फरवरी शनिवार से शुरू होगी और समापन 18 फरवरी रविवार को होगा। घट स्थापना का मुहूर्त 10 फरवरी की सुबह 8.45 मिनट से सुबह 10.10 मिनट तक है जबकि कलश स्थापना का अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12.13 मिनट से 12.58 मिनट तक है।


मां दुर्गा के घोड़े पर आगमन अशुभ संकेत

ज्योतिषाचार्य दिनेश दास ने बताया कि हर नवरात्रि पर दुर्गाजी अलग अलग वाहनों पर सवार होकर धरती पर आती है इस बार उनके आगमन का वाहन घोड़ा है। मातारानी की इस सवारी से आना अशुभ संकेत है। इससे लोगों में भय और युद्ध की प्रबल आशंका है। घर-परिवार में अशांति आएगी। जब मातारानी भैंसे पर विदा होंगी तो लोगों के बिमार होने की संभावना है।

Published on:
29 Jan 2024 01:39 pm
Also Read
View All