जगदलपुर

बंदूक की दुनिया छोड़ने के 1 साल बाद क्या बदला, पूर्व नक्सल कमांडर ने बताई आपबीती, आप भी पढ़ें…

Naxal Surrender: मल्लोजुला वेणुगोपाल उर्फ सोनू दादा ने नक्सलवाद छोड़ने के एक साल बाद अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि हथियार छोड़ने का फैसला उनके जीवन का निर्णायक मोड़ रहा।
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Oct 19, 2026
Mallojula Venugopal Interview
आत्मसमर्पण कर चुका माओवादी नेता सोनू भूपति (फोटो सोर्स- ANI)

Mallojula Venugopal Interview: माड़ की पहाड़ियों से उतरकर हथियार छोड़ने और संविधान को स्वीकार करने तक का सफर पूर्व नक्सली नेता और पोलित ब्यूरो सदस्य मल्लोजुला वेणुगोपाल उर्फ सोनू दादा के जीवन का निर्णायक मोड़ रहा। 15 अक्टूबर 2025 को उनके साथ 60 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था। एक साल बाद विशेष बातचीत में उन्होंने हथियार छोड़ने के फैसले, पुलिस के साथ अविश्वास और आत्मसमर्पण के दिन के अनुभव साझा किए। वेणुगोपाल के मुताबिक, इस निर्णय से हजारों कैडरों की जान बच पाई औ र बीते एक साल के अनुभव ने उनके फैसले पर विश्वास और मजबूत किया।

प्रश्न: हथियार छोड़े एक साल हो चुके हैं, इस फैसले को कैसे देखते हैं?

उत्तर: मुझे और मेरे साथ 60 लोगों को सरकार के सामने हथियार सौंपे एक वर्ष हो गया है। यह जीवन हमारे पुराने जीवन से पूरी तरह अलग है। बीते एक साल के अनुभव ने हमारे फैसले के सही होने का विश्वास मजबूत किया है। सहयोग करने वाले हर व्यक्ति के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। मीडिया का भी विशेष धन्यवाद। इस निर्णय से हजारों कैडरों की जान बच पाई।

प्रश्न: आत्मसमर्पण के लिए आगे बढ़ते समय मन में क्या चल रहा था?

उत्तर: 13 अक्टूबर 2025 की दोपहर हम माड़ की पहाड़ियों से नीचे उतरे। पूरे रास्ते बारिश होती रही। हम गुरिल्ला वेशभूषा में थे। शाम को पामुलागौतमी नदी पार की। खेतों में काम कर रहे किसान हमें आश्चर्य से देख रहे थे। उनकी आंखें मानो पूछ रही थीं कि हम कहां जा रहे हैं और क्या होने वाला है। उन्हें नहीं पता था कि हम हथियार छोड़ने जा रहे हैं। एक महीने पहले मैंने सशस्त्र संघर्ष के अस्थायी विराम की घोषणा की थी, लेकिन इंटरनेट तक पहुंच नहीं रखने वाले इन आदिवासियों को इसकी जानकारी नहीं थी।

प्रश्न: हथियार छोड़ने के लिए आगे बढ़ते समय पुलिस और आपके बीच अविश्वास की स्थिति कैसी थी?

उत्तर: काफी दूर पैदल चलने के बाद रात करीब नौ बजे हम पुलिस के वाहनों में बैठे। हमें लेने आए पुलिसकर्मियों को चिंता थी कि हथियारों से लैस हम क्या करेंगे। उन्हें अपनी जान का डर था। हमारे मन में भी पुलिस के धोखा देने की आशंका थी। तभी एक अधिकारी हमारे पास आए, हाथ मिलाया और मुझे फोन दिया। दूसरी ओर जिला एसपी थे। उन्होंने भरोसा दिलाया।

प्रश्न: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और शीर्ष पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में आत्मसमर्पण का वह दिन आपके लिए कैसा रहा?

उत्तर: 15 अक्टूबर को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, डीजीपी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में कार्यक्रम आयोजित हुआ। हम एक-एक कर मंच पर पहुंचे और मुख्यमंत्री को हथियार सौंपे। हमने संविधान को स्वीकार किया। गढ़चिरौली के सैकड़ों लोग और बड़ी संख्या में मीडियाकर्मी मौजूद थे। तालियों की गड़गड़ाहट के साथ हमारा स्वागत हुआ। 15 अक्टूबर भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन के इतिहास में दर्ज होने वाला दिन बन गया।

Updated on:
19 Oct 2026 10:01 am
Published on:
19 Oct 2026 10:01 am