Raksha Bandhan 2025: बीजापुर के नक्सल प्रभावित भैरमगढ़ ब्लॉक में मंगलदेई का जीवट और मेहनत चर्चा का विषय बना हुआ है।
जगदलपुर@ शेख तैय्यब ताहिर।Raksha Bandhan 2025: बीजापुर के नक्सल प्रभावित भैरमगढ़ ब्लॉक में मंगलदेई का जीवट और मेहनत चर्चा का विषय बना हुआ है। नक्सलियों ने जेठ की हत्या कर दी, उनका मजदूर परिवार तबाह हो गया…गांव छोड़ना पड़ा लेकिन मंगलदेई ने हिम्मत नहीं हारी। साहस और काम की लगन से मंगलदेई अब क्षेत्र में नक्सल पीड़ित महिलाओं के लिए प्रेरणा बनी हुई है। रक्षाबंधन पर मंगलदेई के समूह की बनाई राखियां क्षेत्र के भाइयों की हाथों पर सजेंगी। बाजार के साथ हर सरकारी कार्यालय में मंगलदेई की राखियों के स्टॉल लगाए जा रहे हैं।
मंगलदेई गोदाम पारा पुनर्वास शिविर से ही महिला स्वयं सहायता समूह चलाती हैं और उन्हें शिविर में हर कोई मंगलदेई दीदी कहता है। मां दुर्गा स्वयं सहायता समूह के माध्यम से अब वे शिविर की अन्य महिलाओं के साथ बांस, ताड़ के पत्तों, और छिंद के पत्तों से पारंपरिक राखियां बनाकर न केवल अपनी आजीविका को मजबूती दे रही हैं, बल्कि नक्सल हिंसा की छाया से उबरकर नई उम्मीदों को भी आकार दे रही हैं। कुछ साल पहले मंगलदई के जेठ चैतू राम यादव की नक्सलियों ने हत्या कर दी थी। परिवार के मुखिया की हत्या होने के कारण परिवार दहशतजदा था। डर और असुरक्षा के माहौल में वे राहत शिविर में पहुंचीं।
शिविर में बस्तर के कई पीड़ित परिवारों की महिलाओं के साथ उन्होंने नक्सल हिंसा से सुरक्षित रहकर अपने जीवन को फिर से संवारने की कोशिश की। उनका पति मजदूरी करता है लेकिन मंगलदेई अन्य महिलाओं के साथ मिलकर राखियां बना रही हैं और भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को मजबूत करने का एक भावनात्मक संदेश भी देती हैं।
मंगलदेई दीदी बताती हैं कि हमने बहुत कुछ खोया है, लेकिन अब हम अपने हाथों से कुछ बनाना चाहते हैं। ये राखियां सिर्फ धागे और पत्ते नहीं, बल्कि हमारी उम्मीद और हौसले की कहानी हैं। इन राखियों की खासियत उनकी पर्यावरण-अनुकूल सामग्री और स्थानीय शिल्पकारी है, जो बस्तर की सांस्कृतिक धरोहर को भी दर्शाती है।