जगदलपुर

Naxal News: इश्क के खातिर लाल आतंक से तौबा, 10 लाख के इनामी नक्सली कमांडर ने सुनाई अपनी दर्द भरी दास्तां

Naxal News: समर्पण के बाद नक्सलियों के खतरे की वजह से 10 लाख का इनामी कमांडर घर नहीं लौट पा रहा है। नक्सल संगठन में खून-खराबा ऐसा देखा कि पुलिस के साथ नहीं रहना चाहता। वहीं सरेंडर के बाद मडकम लक्ष्मण दर-दर की ठोकरें खा रहा, खेत में मजदूरी करने को विवश सामान्य जीवन जीने की चाहत है। लेकिन घर में ऐसी दहशत की वापसी नहीं हो रही।

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Naxal News: इश्क के खातिर लाल आतंक से तौबा कर ली। खून खराबा इतना बेचैन करने लगा कि अपनी प्रेमिका के साथ नक्सल संगठन छोड़ दिया। सरेंडर कर घर वापस लौटा तो घर वालों ने यह कहते हुए लौटा दिया कि घर से वापस चले जाओ यहां रहोगे तो तुहारी वजह से हम पर भी जान का खतरा रहेगा। सरेंडर के बाद हासिल अब बस इतना है कि नक्सलियों से छिप-छिपाकर दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही है। यह दर्दभरी कहानी 10 लाख के इनामी नक्सली कमांडर मडकम लक्ष्मण की है।

Naxal News: शौक में संगठन से जुड़ा और मोहब्बत के खातिर छोड़ा

मड़कम लक्ष्मण ने बताया कि संगठन में 2014 में शामिल हुआ था। इसके बाद उसे एमएमसी जोन में भेज दिया गया। लगातार फोर्स का दवाब बन रहा था। कई मुठभेड़ों में वह बाल-बाल बचा। इसी बीच एक ही प्लाटून में साथ काम करने वाली उर्मिला से प्यार हो गया दोनों ने मिलकर फैसला किया नक्सल संगठन को छोड़ कर भागना है। दोनों किसी तरह 2019 में भाग कर अपने गांव आ गए। उस दौरान कैंप की स्थापना नहीं हुई थी। चुपचाप गांव में रहकर खेती कर रहे थे लेकिन जब कैंप खुला तो वापस लौटना पड़ा और अब तब सरेंडर कर चुका है तो वापस गांव आने पर नक्सलियों से जान का खतरा खड़ा हो गया है।

तगड़ी सुरक्षा में रहते हैं सेंट्रल कमेटी के नक्सली

Naxal News: Naxali commanderमड़कम लक्ष्मण के अनुसार गढ़चिरौली एनकांउटर में मारे गए सेंट्रल कमेटी के सदस्य दीपक को उसने करीब से देखा है। जब वह मीटिंग लेने आता था तो डीवीसी और एसजेसी स्तर के लोग ही ड्यूटी में रहते थे। सुरक्षा में आठ से 10 किमी दूर से ही लगा दिया जाता था। उस दौरान यदि गोली चलती है तो अपने लीडर को बचाना प्रथम कर्तव्य होता था। डीवीसी देवा, एसजेडसी कबीर दादा, डीवीसी दामा और डीवीसी राकेश उर्फ दीवाकर के साथ में भी काम किया है। इनमें दामा की मौत बीमारी के चलते हो चुकी है।

मड़कम ने कवर्धा एसपी के सामने किया सरेंडर

बता दें कि मड़कम ने पिछले महीने ही 30 अगस्त को कवर्धा एसपी के सामने सरेंडर किया और आज वह भटक रहा है। दरअसल वह पुलिस के साथ भी काम नहीं करना चाहता इसलिए उसकी मुश्किलें और ज्यादा बढ़ गई हैं। मडकम का कहना है कि नक्सल संगठन में रहते हुए इतना खून-खराबा देखा है कि अब फिर फोर्स के साथ जाकर वही काम नहीं करना चाहता। मड़कम मदद की आस लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोरी के पास पहुंचा है।

मामले में सोनी का कहना है कि पुलिस अगर समर्पण करवा रही है तो सरेंडर करने वालों के लिए सुरक्षित माहौल भी तैयार करना चाहिए जहां वे अपने आगे की जिंदगी सुकून से जी सकें। मड़कम एमएमसी जोन के भोरमदेव एरिया कमेटी के प्लाटून नबर 2 का सदस्य था। उसे अपने साथ में काम करने वाली महिला नक्सली से उर्मिला से प्यार हो गया। दोनों का इसी बीच नक्सल संगठन से मोह भंग हो गया और दोनों संगठन छोड़ गांव आ गए।

खून से सने साथियों का शव देख बदला मन

Naxal News: मड़कम ने बताया कि 2016-17 में झिलमिली के जंगल में मुठभेड़ हुई। इस मुठभेड़ में 25 नक्सली शामिल थे। सभी प्लाटून नंबर 2 के सदस्य थे। साथ में उसकी प्रमिका उर्मिला भी थी। फोर्स ने ताबड़तोडृ गालियां बरसाई। उनकी तरफ से भी भी फोर्स पर गोली चलाई गई। एक गोली उर्मिला के कान के पास से गुजरी, मैं भी बाल बाल बच गया।

इस मुठभेड़ में दो साथी मानू और हुंगा मारे गए। मानू को फोर्स लेकर चली गई और हुंगा के शव को हम लोग अपने साथ लेकर आए। इस वारदात ने सभी नक्सलियों को दहशतजदा कर दिया। अपने साथी का अंतिम संस्कार करने के बाद कोई किसी से बात ही नहीं कर रहा था। सब डरे सहमे हुए थे। उर्मिला से बात की तो उसने कहा चलो अब वापस चलते हैं और फिर वापस लौट आए।

2019 में हम लोग भागने में सफल हो गए। गांव में खेती-बाड़ी कर रहे थे फिर सोचा कि अधिकृत रूप से समर्पण कर दिया जाए और इसी साल 30 अगस्त को कावर्धा पुलिस के सामने समर्पण कर दिया।

Published on:
29 Sept 2024 02:37 pm
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