
Chhattisgarh News: जैव विविधता के लिये विख्यात कांगेर घाटी में पक्षियों के बाद अब मगरमच्छ की गिनती होने वाली हैं। जानकारी के मुताबिक जूलाजिकल सर्वे ऑफ इंडिया कलकत्ता और दिल्ली की संयुक्त टीम इस गणना में सहयोग करेगी। फरवरी के प्रथम सप्ताह में शुरू होने वाली मगरमच्छों की गणना से कांगेर घाटी में मौजूद मगरमच्छ की कई प्रजातियों की जानकारी मिलेगी इससे इससे यहां के वन्य प्राणी संरक्षण अभियान को भी फायदा मिलेगा। वर्तमान में यहां पर मगर मित्र की टीम कार्यरत है जो यहां पाये जाने वाले मगरमच्छों पर नजर रखती है।
कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में बहने वाले कांगेर नाला 15 किमी दूर कोलेंग के नजदीक शबरी नदी में समाहित हो जाता है। जबकि शबरी नदी यहां से 130 किमी दूर गोदावरी नदी में मिलती है। चूंकि गोदावरी आगे बढ़ते हुए समुद्र में मिल जाती है। वन्य प्राणी एक्सपर्ट व क्रो फाउंडेशन के रवि नायडू के मुताबिक बारिश के दिनों में जब नदियों में बहाव चरम पर होता है तभी यह मगरमच्छ पानी के साथ तैरते हुए कांगेर वैली में पहुंचते है। कांगेर घाटी में दर्जनों स्पॉट ऐसे हैँ जहां इन मगरमच्छों को आसानी से देखा जा सकता है।
पार्क में वन्य जीव जंतुओं के संरक्षण के लिए काम करने वाले रवि नायडू ने बताया कि यहाँ मिलने वाला मगरमच्छ एस्टूएराइन क्रोकोडाइल है। इसका वैज्ञानिक नाम क्रोकोडीलस पोरोसस है । इस प्रजाति के एक वयस्क मगरमच्छ की लंबाई 13 से 18 फीट तथा इसका वजन एक ह•ाार किलो से अधिक होता है। यह उत्तरी आस्ट्रेलिया, भारत के पूर्वी तट और पूर्वी एशिया में पाया जाता है। इस प्रजाति के मगरमच्छ का कांगेर वैली में मिलना बड़ी बात है। इंटरनेशनल यूनियन फॉर कन्जर्वेशन ऑ$फ नेचर ने इसे संकटग्रस्त प्रजातियों की लाल सूची की एलसी श्रेणी में रखा है।