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Chhattisgarh News: इतिहास की जड़ें हिलीं! बस्तर में 125 साल पुराना पेड़ गिरा, शहर के पुराने वृक्षों पर खतरे की घंटी

Historic Mango Tree: जगदलपुर के सिटी ग्राउंड के सामने 125 साल पुराना आम का पेड़ गिर गया। बड़ा हादसा टला, लेकिन विशेषज्ञों ने मार्ग पर खड़े अन्य पुराने पेड़ों की तत्काल जांच की मांग उठाई।
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Chhattisgarh News

बड़ा हादसा टला (photo source- Patrika)

Chhattisgarh News: सिटी ग्राउंड के सामने शनिवार सुबह जड़ से उखड़कर गिरा विशाल आम का पेड़ केवल एक सामान्य घटना नहीं, बल्कि शहर के वर्षों पुराने वृक्षों की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर गया है। पर्यावरण प्रेमी अनिल लुंकड़ के अनुसार यह आम का पेड़ करीब 125 वर्ष पुराना था और रियासतकाल में लगाए गए उन ऐतिहासिक वृक्षों में शामिल था, जो कभी बस्तर की पहचान हुआ करते थे। गनीमत रही कि पेड़ अल सुबह गिरा, जब सड़क पर ट्रैफिक लगभग नहीं था।

Jagdalpur Tree Fall: भविष्य में दोहराई जा सकती हैं ऐसी घटनाएं

यदि यह घटना दिन के व्यस्त समय में होती तो बड़ा हादसा हो सकता था। जानकारों के अनुसार जिस पेड़ के गिरने की घटना हुई, उसकी जड़ें काफी हद तक सड़ चुकी थीं। बाहर से हरा-भरा दिखाई देने वाला यह पेड़ भीतर से कमजोर हो चुका था। इसी मार्ग पर ऐसे करीब पांच और विशाल एवं पुराने पेड़ मौजूद हैं, जिनकी स्थिति की तत्काल तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए। यदि समय रहते उनकी मजबूती और जड़ों की स्थिति का आकलन नहीं किया गया तो भविष्य में ऐसी घटनाएं दोहराई जा सकती हैं।

राजपरिवार ने 125 साल पहले पूरे संभाग में लगवाए थे आम के पेड़

पर्यावरण प्रेमी अनिल लुंकड़ बताते हैं कि 125 वर्ष पूर्व बस्तर राज परिवार ने पूरे बस्तर संभाग की प्रमुख सड़कों के दोनों ओर हजारों आम के पौधे लगवाए थे। इन पेड़ों ने दशकों तक यात्रियों को छाया देने के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हालांकि समय के साथ सड़क चौड़ीकरण, विकास कार्यों, प्राकृतिक आपदाओं, आंधी-तूफान और बढ़ते शहरीकरण के कारण अधिकांश पुराने वृक्ष समाप्त हो चुके हैं। जो बचे हैं, वे अब अपनी आयु के अंतिम पड़ाव पर हैं।

महापौर और निगम की टीम पेड़ हटवाती रही

पेड़ गिरने की सूचना मिलते ही महापौर संजय पांडेय और उनकी टीम के लोग मौके पर पहुंचे और वन विभाग के सहयोग से पेड़ को सडक़ के बीच से हटवाया। इस दौरान रास्ते पर आवाजाही कुछ देर के लिए बाधित रही।

ऐसे पेड़ों का हेल्थ रिकॉर्ड होना जरूरी पर उपलब्ध नहीं

चिंता की बात यह है कि शहर में मौजूद ऐसे विशाल एवं ऐतिहासिक पेड़ों का कोई समग्र रिकॉर्ड या स्वास्थ्य संबंधी डेटा न तो वन विभाग के पास उपलब्ध है और न ही नगर निगम के पास। किस पेड़ की उम्र कितनी है, उसकी जड़ों और तने की स्थिति क्या है तथा कौन-से पेड़ जोखिम की श्रेणी में हैं, इसका कोई व्यवस्थित सर्वेक्षण अब तक नहीं किया गया है।

Bastar Environment: काटे बगैर ऐसे पुराने पेड़ को मिले संरक्षण

नगर निगम, वन विभाग और उद्यानिकी विशेषज्ञों की संयुक्त टीम बनाकर शहर के सभी पुराने एवं विशालकाय वृक्षों का वैज्ञानिक स्वास्थ्य परीक्षण यानी ट्री हेल्थ ऑडिट कराया जाना चाहिए। इससे कमजोर और खतरनाक पेड़ों की समय रहते पहचान हो सकेगी तथा आवश्यक उपचार, सहारा या अन्य सुरक्षा उपाय अपनाए जा सकेंगे। उनका कहना है कि इन ऐतिहासिक वृक्षों का संरक्षण जितना आवश्यक है, उतना ही नागरिकों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है। इसलिए शहर के सभी पुराने पेड़ों की नियमित समीक्षा और निगरानी अब समय की सबसे बड़ी जरूरत बन गई है— संपत झा, ट्री मैन