
बस्तर का दुर्लभ वाटरकॉक (photo source- Patrika)
Watercock Bird: बारिश की पहली फुहारें केवल धरती को ही नहीं, बल्कि जंगलों और खेतों को भी नई जिंदगी देती हैं। छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में इन दिनों एक ऐसी आवाज फिर सुनाई देने लगी है, जिसका इंतजार सिर्फ किसान ही नहीं, बल्कि पक्षी प्रेमी और वन्यजीव फोटोग्राफर भी पूरे साल करते हैं। यह आवाज है दुर्लभ पक्षी वाटरकॉक (Gallicrex cinerea) की, जिसे स्थानीय लोग प्यार से 'कपकपिया' कहते हैं। धान के खेतों, दलदली इलाकों और घनी घास के बीच छिपकर रहने वाला यह पक्षी मानसून का एक अनोखा संदेशवाहक माना जाता है। इसकी मौजूदगी यह संकेत देती है कि प्रकृति अपने सबसे जीवंत रूप में लौट रही है।
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