जगदलपुर

पत्रिका एक्सक्लूसिव: फंदा लगाकर नहीं बच पाएंगे शिकारी, बस्तर में पहली बार तैनात स्निफर डॉग, ऐसे पहुंचेगा शिकारियों तक

Indravati Tiger Reserve: बस्तर के जंगलों में वन्यजीवों के शिकार के लिए फंदा लगाने वाले शिकारियों पर अब शिकंजा कसने की तैयारी है। इंद्रावती टाइगर रिजर्व में पहली बार प्रशिक्षित स्निफर डॉग की तैनाती की गई है।
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Oct 04, 2026
Sniffer Dog Training
स्निफर डॉग (फोटो सोर्स- पत्रिका)

जगदलपुर@मनोज साहू। Sniffer Dog in Bastar: बस्तर के जंगलों में वन्यजीवों के शिकार के लिए बिछाए जाने वाले फंदों पर अब स्निफर डॉग की मदद से शिकंजा कसने की तैयारी है। इंद्रावती टाइगर रिजर्व में पहला प्रशिक्षित स्निफर डॉग तैनात होने के बाद वन विभाग ने एंटी-स्नेर वॉक के साथ डॉग स्क्वॉड की मॉक ड्रिल शुरू कर दी है। खास बात यह है कि डॉग को केवल फंदा खोजने का ही नहीं, बल्कि उसकी गंध से आगे के सुराग तलाशते हुए संभावित संदिग्ध तक पहुंचने की प्रक्रिया का भी अभ्यास कराया जा रहा है।

इंद्रावती टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर उत्तम गुप्ता और डिप्टी डायरेक्टर सुमेध संजय सुरवाडे के मार्गदर्शन में चल रही इस कवायद का उद्देश्य वन्यजीव अपराध की जांच और रोकथाम को मजबूत करना है। मॉक ड्रिल के दौरान जंगल में एक निर्धारित स्थान पर फंदा रखा जाता है। इसके बाद डॉग को उसकी गंध सूंघाकर सुरागों का पीछा कराया जाता है। वन अमला डॉग के साथ समन्वय बनाकर संभावित संदिग्ध के स्थान तक पहुंचने की प्रक्रिया का अभ्यास करता है।

फंदा लगाने के बाद शिकारी छोड़ जाते हैं सुराग

वन्यजीवों के शिकार के लिए लगाए गए फंदे अक्सर जंगल में छिपाकर रखे जाते हैं। शिकारी फंदा लगाने के बाद मौके से निकल जाते हैं। घना जंगल, झाड़ियां और बड़ा वन क्षेत्र होने के कारण सामान्य गश्त के दौरान हर फंदे और उससे जुड़े सुराग तलाशना चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में प्रशिक्षित डॉग की सूंघने और गंध के आधार पर पीछा करने की क्षमता वन अमले के लिए मददगार हो सकती है।

एंटी-स्नेर वॉक को मिलेगा डॉग का साथ

इंद्रावती टाइगर रिजर्व में संवेदनशील इलाकों में लगातार पैदल गश्त कर फंदों की तलाश की जा रही है। अब डॉग स्क्वॉड के जुड़ने से दुर्गम और घने इलाकों में फंदे और शिकार से जुड़े सुराग तलाशने की क्षमता बढ़ाने पर जोर है। फंदे बाघ, तेंदुआ, हिरण और जंगली सूअर समेत अन्य वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा हैं। इनमें फंसकर वन्यजीव घायल होने के साथ मौत का शिकार भी हो सकते हैं।

पंचकूला से ट्रेंड होकर बस्तर आया है डॉग

इंद्रावती टाइगर रिजर्व को मिला स्निफर डॉग पंचकूला स्थित डॉग प्रशिक्षण केंद्र में प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद यहां पहुंचा है। डॉग के साथ उसके हैंडलर को भी प्रशिक्षण दिया गया है। डॉग को गंध पहचानने, फंदे और शिकार से जुड़े सुराग तलाशने तथा गंध के आधार पर पीछा करने का अभ्यास कराया गया है। वहीं हैंडलर को डॉग के संकेत समझने, उसे नियंत्रित करने और वन अमले के साथ मिलकर तलाशी अभियान चलाने का प्रशिक्षण दिया गया है।

वनविभाग में दर्ज मामले

वर्ष - अपराध - जब्त वहान - जुर्माना (लख में)

  • 2023 - 18956 - 292 - 165.17
  • 2024 - 20067 - 343 - 109.52
  • 2025 - 20021 - 372 - 129.34
  • 2026 - 15000 - 195 - 112.2+

एक डॉग से शुरुआत, संख्या बढ़ाएंगे

उत्तम गुप्ता, मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) के मुताबिक, इंद्रावती टाइगर रिजर्व में फिलहाल एक स्निफर डॉग से शुरुआत की गई है। आगे इसकी संख्या बढ़ाएंगे। इसके उपयोग और अनुभव के आधार पर भविष्य में अन्य संवेदनशील वन क्षेत्रों में भी प्रशिक्षित डॉग की मदद लेने की संभावनाएं हैं। एंटी-स्नेर वॉक और मॉक ड्रिल के जरिए वन अमले तथा डॉग स्क्वॉड के बीच समन्वय को लगातार बेहतर किया जा रहा है।

Updated on:
04 Oct 2026 09:00 am
Published on:
04 Oct 2026 09:00 am