HSRP Number Plate: हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाने का अभियान धीमा पड़ गया है। एक साल में केवल 7.5% वाहनों पर ही प्लेट लग पाई है। अब सरकार के नए निर्देशों का इंतजार किया जा रहा है।
HSRP Number Plate: जगदलपुर जिले में वाहनों पर हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट (एचएसआरपी) लगाने की प्रक्रिया लगभग ठप हो गई है। स्थिति यह है कि बीते एक साल में कुल पंजीकृत वाहनों में से महज करीब 7.5 प्रतिशत वाहनों पर ही हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लग पाई है, जबकि शेष वाहन अब भी पुराने नंबर प्लेट के साथ सडक़ों पर दौड़ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, परिवहन विभाग द्वारा हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट को अनिवार्य किए जाने के बावजूद इसे लगाने में लोगों ने रूचि नहीं दिखाई। लगातार जागरूकता के बाद कुछ वाहन मालिकों ने ऑनलाइन आवेदन तो किया, लेकिन प्लेट मिलने की धीमी प्रक्रिया के चलते परेशान दिखे। कई आवेदकों का कहना है कि महीनों बीत जाने के बाद भी उन्हें न तो नंबर प्लेट मिली और न ही कोई स्पष्ट सूचना दी जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, नंबर प्लेट जारी करने वाली अधिकृत एजेंसी ने फिलहाल काम बंद कर दिया है। जिले में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाने की धीमी रफ्तार और एजेंसी द्वारा काम बंद किए जाने से व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई है। जिसके चलते पूरा सिस्टम प्रभावित हो गया है। नई बुङ्क्षकग तो ली जा रही है, लेकिन प्लेट तैयार करने और लगाने की प्रक्रिया लगभग रुक गई है।
परिवहन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में नई गाइडलाइन और तकनीकी निर्देशों का इंतजार किया जा रहा है। जब तक शासन स्तर से स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं मिलते, तब तक कार्य में तेजी आना मुश्किल नजर आ रहा है।
एक ओर जहां बिना हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट वाले वाहनों पर कार्रवाई की संभावना बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर लोगों को प्लेट उपलब्ध नहीं हो पा रही है। इस विरोधाभासी स्थिति ने आम वाहन चालकों को असमंजस में डाल दिया है।
हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट एल्यूमीनियम की बनी विशेष प्लेट होती है, जिसमें यूनिक लेजर कोड, होलोग्राम और सुरक्षा फीचर्स होते हैं। इसका उद्देश्य वाहन चोरी और फर्जी नंबर प्लेट के उपयोग पर रोक लगाना है। इसे सभी प्रकार के वाहनों के लिए अनिवार्य किया गया है। इस नंबर प्लेट में किसी भी तरह की छेड़छाड़ या परिवर्तन करना आसान नहीं है।
लगाने वाले एजेंसी द्वारा काम बंद किए जाने से फिलहाल काम ठप्प है। ऐसे में सरकार के नए निर्देशों का इंतजार किया जा रहा है। जिसके बाद इस व्यवस्था पर फिर से काम किया जाएगा— डीसी बंजारे, जिला परिवहन अधिकारी बस्तर