
जयपुर. देश में करीब 10 हजार 'रावण' हैं। वे, जो हर साल मंडलियों के साथ कई स्थानों पर रामलीला में रावण का किरदार निभाते हैं। इतना प्रभावी कि ज्यादातर उन्हें रावण के नाम से जानते हैं।
ऐसे कई 'रावण' अभी जयपुर में हैं। इन्हीं में हैं प्रकाश चतुर्वेदी (60) । खानदानी 'रावण'। उनकी मंडली न्यू गेट स्थित रामलीला मैदान में पड़ाव डाले है। राजस्थान पत्रिका के जरिए जानिए चतुर्वेदी की जुबानी।
प्रभाव
अहम किरदार है रावण। इसे यूं निभाता हूं कि देखने वाले रावण से नफरत करें। उसका नाश कर खुश हों। वे रावण जैसा न बनना चाहें।
परम्परा
पुरातन काल से रामलीला में महिला पात्र भी पुरुष निभाते रहे हैं। ज्यादातर की तरह मेरी मंडली में एक भी महिला नहीं हैं। श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं। रामलीला के मंचन सहित माताओं-बहनों की मर्यादा का विशेष ध्यान रखते हैं। जयपुर में 4 बड़ी रामलीलाओं में किसी मंडली में महिलाएं नहीं हैं।
इधर जेल में...
महिला जेल (घाटगेट) में सोमवार को महिला कैदियों ने रामलीला का मंचन किया। इसके लिए बंदियों ने किरदारों की पोशाकें बनाई। जेल उपाधीक्षक मोनिका ने बताया कि बंदियों ने नवरात्र के दौरान रामायण व दुर्गा सप्तशती के पाठ किए, उपवास रखे।
इनका कहना है
मथुरा का हूं। पीढिय़ों से मेरा परिवार रामलीला का मंचन कर रहा है। परदादा, दादा, पिता भी रामलीला करते थे। मैं 30 साल से रावण का किरदार निभा रहा हूं। अगली पीढ़ी ने भी यह कला सीखी है। अपनी मंडली का खुद निर्देशक हूं, जिसमें लगभग 40 कलाकार हैं।