कड़ाके की सर्दी और घने कोहरे के बीच नींदड़ की धरती आस्था से पूरी तरह सरोबार नजर आई। ठिठुरती हवा में जब शंखनाद, बैंड वादन की मधुर स्वर लहरियां और जय श्रीराम के उद्घोष गूंजे, तो सर्दी मानो पीछे हट गई।
जयपुर. कड़ाके की सर्दी और घने कोहरे के बीच नींदड़ की धरती आस्था से पूरी तरह सरोबार नजर आई। ठिठुरती हवा में जब शंखनाद, बैंड वादन की मधुर स्वर लहरियां और जय श्रीराम के उद्घोष गूंजे, तो सर्दी मानो पीछे हट गई। केसरिया ध्वजाओं की लहराहट और मंगल गीतों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। सिर पर कलश लिए श्रद्धालु महिलाएं, ठंड से सुर्ख चेहरे और आंखों में विश्वास की चमक लिए आगे बढ़ती रहीं। कोहरे की चादर में लिपटा नजारा भक्ति के उजास से खिल उठा। बुधवार को यही नजारा रहा सीकर रोड स्थित नींदड़ आवासीय योजना में 8 से 16 जनवरी तक जगदगुरु स्वामी रामभद्राचार्य के सानिध्य में आयोजित 1008 हनुमत महायज्ञ की शुरुआत से पूर्व कलश यात्रा का।
कुकरखेड़ा मंडी से लवाजमे के साथ ही निकली कलश यात्रा में 11 हजार महिलाएं शामिल हुई। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी ने कलश की पूजा अर्चना की। इसके बाद उप मुख्यमंत्री ने महिलाओं के साथ कलश सिर पर रखा। आयोजन समिति से जुड़े अनिल संत ने बताया कि यात्रा का मुख्य आकर्षण देवी-देवताओं की झांकी रहीं। कलाकार मां काली, हनुमान, जामवंत, राम-लक्ष्मण समेत कई रूपों में नजर आए। यात्रा के दौरान शिव बारात की झांकी भी शामिल हुई। जिसमें भस्म लगाए कलाकर शिव के गण बनकर शामिल हुए। महिलाएं चार किमी.की दूरी तय कर नींदड़ आवासीय योजना स्थित कथा स्थल पहुंची। कलश यात्रा संयोजक प्रहलाद दादिया ने बताया कि कलश यात्रा के मार्ग पर 51 स्वागत द्वार बनाए गए। जगह—जगह पुष्प वर्षा कर जगह-जगह उनका स्वागत किया गया।
आज से कथा का वाचन
प्रभु नारायण अग्रवाल और बनवारी खटोड़ ने बताया कि गुरुवार दोपहर तीन बजे से जगदगुरु स्वामी रामभद्राचार्य रामकथा का वाचन करेंगे। शिष्य रामचंद्र के सानिध्य में समस्त अनुष्ठान होंगे। इस दौरान एक करोड़ 51 लाख हनुमान नाम जप के माध्यम से विश्व शांति, मानव कल्याण और राष्ट्र उत्थान की कामना की जाएगी। यह होगा खास कार्यक्रम के लिए 350 बाय 450 मीटर क्षेत्र में यज्ञशाला का निर्माण किया गया है, जिसमें 1008 यज्ञकुंड बनाए हैं। महायज्ञ में 1451 वैदिक विद्वान हवन कराएंगे। श्रद्धालु बड़ी संख्या में यज्ञशाला की परिक्रमा भी करेंगे। हाथोज धाम के स्वामी बालमुकुंदाचार्य ने बताया कि देशभर से औषधियां मंगवाई गई है। 25 हजार लीटर घी, दो लाख किलो लकड़ी की व्यवस्था की गई है। हवन करने से वातावरण शुद्ध होगा। सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होगी। लगभग 50 हजार लोगों सहित यजमानों एवं संत-महात्माओं के लिए भोजन प्रसादी की व्यवस्था की गई है। लकड़ी के चूल्हों पर सात्विक भोजन तैयार किया जाएगा। 111 हलवाई पूरे आयोजन काल में भोजन व्यवस्था संभालेंगे।