जयपुर

Rajasthan News: राजस्थान के जर्जर स्कूलों की 5 साल में बदलेगी की सूरत, 12 हजार करोड़ रुपए होंगे खर्च

Rajasthan Government School: राज्य सरकार ने प्रदेश के जर्जर और क्षतिग्रस्त सरकारी स्कूलों के सुधार के लिए पांच वर्षीय कार्ययोजना तैयार की है।

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Mar 21, 2026
सरकारी स्कूल। पत्रिका फाइल फोटो

जयपुर। राज्य सरकार ने प्रदेश के जर्जर और क्षतिग्रस्त सरकारी स्कूलों के सुधार के लिए पांच वर्षीय कार्ययोजना तैयार की है। मुख्य सचिव की ओर से हाईकोर्ट में 792 पेज की रिपोर्ट पेश की गई, जिसमें अगले पांच वर्षों में 12,335 करोड़ रुपए खर्च कर स्कूल भवनों की स्थिति सुधारने का प्लान बताया गया है।

योजना के तहत 3,587 जर्जर स्कूलों के नए भवन बनाने के लिए 2,487 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। वहीं, 22,589 भवनों की मरम्मत पर 1,129 करोड़ रुपए और 83,783 जर्जर कक्षा-कक्षों के स्थान पर नए कमरे बनाने पर 8,378 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा 13,616 जर्जर शौचालयों के निर्माण व मरम्मत पर 340 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

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ऐसे जुटाएंगे फंड

सरकार ने बताया कि हर साल करीब ढाई हजार करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इसके लिए सर्व शिक्षा अभियान, डीएमएफटी, सांसद-विधायक निधि, एसडीआरएफ, सीएसआर, राज्य बजट, नाबार्ड और विश्व बैंक जैसे स्रोतों से फंड जुटाया जाएगा।

उदयपुर में सबसे ज्यादा 455 नए स्कूल भवन

जिलेवार योजना में उदयपुर में सबसे अधिक 455 नए स्कूल भवन बनाए जाएंगे। इसके बाद झालावाड़, प्रतापगढ़, बांसवाड़ा और डूंगरपुर में भी बड़ी संख्या में निर्माण प्रस्तावित हैं। जयपुर में 134 नए भवन बनाए जाएंगे।

हाईकोर्ट ने जताई थी नाराजगी

बता दें कि हाल ही प्रदेश के जर्जर स्कूलों के मामले पर हाईकोर्ट ने कहा था कि स्कूलों को 20 हजार करोड़ चाहिए, जबकि बजट में 2 हजार करोड़ रुपए भी नहीं दिए। इस पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा था ​कि बच्चे हमारे, सरकार कह दे कि स्कूल मुहैया नहीं करवा सकते। स्कूलों के बाहर यह भी बोर्ड लगवा दे कि बच्चे अपनी रिस्क पर आ रहे, उनको शिक्षा का अधिकार नहीं।

स्कूलों की मरम्मत के लिए 20 हजार करोड़ की जरूरत

राज्य सरकार की जर्जर स्कूल भवनों व कमरों की मरम्मत के लिए 550 करोड़ रुपए बजट दिया गया। जबकि शिक्षा विभाग यह पहले ही बता चुका कि स्कूलों की मरम्मत के लिए 20 हजार करोड़ की आवश्यकता है। इस पर कोर्ट ने कहा था कि स्कूलों को दी गई राशि कुछ भी नहीं है, ऊंट के मुंह में जीरा है। स्कूलों के लिए जारी राशि के खर्च की कमेटी से मॉनिटरिंग करवा देते हैं। कमेटी में कौन हो और अतिरिक्त फंड की व्यवस्था किस तरह हो, इस पर सभी पक्ष सुझाव दें।

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