
जयपुर। ऑनलाइन धोखाधड़ी (online fraud) के मामले में मुंबई पुलिस की साइबर सेल ने भरतपुर से चल रहे 'जामताड़ा गैंग' (jamtara gang) का भंडाफोड़ किया है। गिरोह के चार सदस्य पकड़े गए हैं। इनके पास से 9 मोबाइल, अलग-अलग बैंकों के 32 डेबिट कार्ड व 835 मोबाइल सिम बरामद हुए हैं। इस गिरोह में भरतपुर के तीन गांवों के लोग शामिल हैं। गैंग के बाकी सदस्यों को गिरफ्तारी हो सकती है। पूछताछ में पता चला कि गिरोह के खिलाफ देश के 19 राज्यों में 300 से ज्यादा ठगी के मामले दर्ज हैं। गिरफ्तार आरोपी ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं। बावजूद इसके ऑनलाइन ऐप ओएलएक्स के जरिए शातिर तरीके से अपराध (heinous crime) को अंजाम देते थे। ग्राहकों को ठगने के लिए इन्हें खास तरह की ट्रेनिंग मिली है।
स्कैन करते ही उस व्यक्ति के खाते से रकम कट
पुलिस ने बताया कि गिरोह के लोग चार समूहों में बंटे हैं। पहला ग्रुप ओएलएक्स प्लेटफॉर्म पर संभावित शिकार की पहचान करता था। ग्रुप के सदस्य ऐसे ग्राहकों की पहचान करते थे जो ओएलएक्स पर सामान बेचना चाहते थे। दूसरा ग्रुप इन ग्राहकों को बताता था कि उनके पास खरीदार है। भरोसा हासिल करने के लिए कुछ एडवांस की पेशकश करते थे। बिक्रेता को क्यूआर कोड भेज यूपीआइ एकाउंट से स्कैन करने के लिए कहते थे। स्कैन करते ही उस व्यक्ति के खाते से रकम कट जाती थी। तीसरा ग्रुप खाते में आए पैसे को तुरंत निकाल लेता था। चौथा ग्रुप भोले-भाले लोगों के नाम खाता खोलता था ताकि वे पकड़े न जाएं।
बंगला बनाया-प्रॉपर्टी खरीदी
पुलिस ने बताया कि ठगी के पैसे से गिरोह के लोगों ने बंगले बनवाए हैं। प्रॉपर्टी खरीदी है। गिरोह के लोग शाम को एक्टिव होते थे। सुबह होने से पहले ठगी कर लेते थे। पिछले साल अगस्त में एक शख्स ने 17 लाख रुपए की धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराइ थी। इसी मामले की जांच के दौरान पुलिस आरोपियों तक पहुंची। जांच में यह भी पता चला कि इस गिरोह के लोग सेक्सटॉर्शन में भी लिप्त हैं।