जब पैंथर ने हमला किया तो चीख भी नहीं पाई वह बेचारी, बन गई शिकार

 अलसुबह वह घर से गायों का चारा लेने के लिए निकली थी लेकिन उसे पता नहीं था कि मौत घात लगाकर बैठी है। पैंथर ने उसे देखते ही उस पर हमला कर दिया और एक पल में ही उसकी जान चली गई। वह बेचारी गूंगी होने के कारण चीख भी नहीं पाई। शनिवार अलसुबह राजसमंद के केलवा गांव के मोखमपुरा क्षेत्र में एक पैंथर के हमले में 40 वर्षीय महिला मारी गई। महिला की पहचान मूली बाई पिता मेघसिंह खरवड़ के रूप में की गई। मूलीबाई मानसिक रूप से विक्षिप्त थीं और गूंगी भी थी। वह अपनी मां के साथ खेतीबाड़ी ही करती थी।

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Dec 12, 2015

अलसुबह वह घर से गायों का चारा लेने के लिए निकली थी लेकिन उसे पता नहीं था कि मौत घात लगाकर बैठी है। पैंथर ने उसे देखते ही उस पर हमला कर दिया और एक पल में ही उसकी जान चली गई। वह बेचारी गूंगी होने के कारण चीख भी नहीं पाई। शनिवार अलसुबह राजसमंद के केलवा गांव के मोखमपुरा क्षेत्र में एक पैंथर के हमले में 40 वर्षीय महिला मारी गई। महिला की पहचान मूली बाई पिता मेघसिंह खरवड़ के रूप में की गई। मूलीबाई मानसिक रूप से विक्षिप्त थीं और गूंगी भी थी। वह अपनी मां के साथ खेतीबाड़ी ही करती थी।
गांववासियों के अनुसार, सुबह दो महिलाएं केसर बाई व उलासी बाई खेत पर गोबर डालने जा रही थी तो वहीं, मंदिर के पास ही उन्होंने मृत मूली बाई को देखा। उसे मृत देखकर शोर मचाते हुए वे गांव की ओर भागी। उन्होंने गांववासियों को सूचित किया। गांववालों ने मौके पर जाकर देखा तो मूली बाई के गले पर पैंथर के निशान देखे। इसके बाद उन्होंने वन विभाग को सूचित किया। वनविभाग की टीम ने मौका मुआयना किया। पैंथर के हमले क ी पुष्टि करते हुए उन्होंने वहां पिंजरा लगा दिया। पैंथर की तलाश अभी जारी है।


गांववासियों ने बताया कि पैंथर इससे पूर्व भी इस क्षेत्र में हमले कर चुका है। एक बार वह किसान लालसिंह के बाड़े में बंधे बछड़े को उठा लेकर गया था तो दूसरी बार खेतों में चर रहे भैंस के बछड़े को अपना शिकार बनाया। मूलीबाई पर हमले के बाद से
गांववासी अब खेतों में जाने से भी कतरा रहे हैं। साथ ही उन्होंने वनविभाग से पैंथर को जल्द पकडऩे की मांग की है।

Published on:
12 Dec 2015 02:15 pm
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