आमतौर पर जन्म कुंडली महज कुछ ही पृष्ठों की होती है, लेकिन इतिहास के झरोखे में अगर झांके तो एक जन्म कुंडली 456 फीट लंबी और 13 इंच चौड़ी मिलती है। आइए आज इसी के बारे में आपको बताएं...
जितेन्द्र सिंह शेखावत/ जयपुर। आमेर के विद्वानों ने रामसिंह प्रथम ( Ram Singh ) के युवराज किशनसिंह की जन्म पत्रिका ( Janam Kundali ) 456 फीट लम्बी और 13 इंच चौड़ी बनाई थी। सिटी पैलेस ( jaipur city palace ) संग्रहालय में मौजूद जन्म पत्री में ग्रह-नक्षत्रों, देवी-देवताओं और उनके वाहनों का चित्रांकन है। द्रव्यवती ( dravyavati river ) के उद्गम आथुनिया बांध से भावसागर के बीच किशन सिंह ने जयशाला नामक रमणीक स्थल बनवाया, जो किशनबाग कहलाता है। सन् 1654 में किशन सिंह जन्मा तब उसका दादा मिर्जा राजा जयसिंह जीवित था।
आमेर नरेश राम सिंह का इकालौता बेटा किशन सिंह बीस साल की उम्र में मुगल सेना में शामिल हुआ। इसे सन् 1674 में अफगानिस्तान में कबायलियों का विद्रोह दबाने भेजा। सन् 1681 में औरंगजेब के निर्देश पर नवाब हसन अली के साथ दक्षिण में गया। वहां लड़ते हुए 28 साल की आयु में मृत्यु हो गई। छाजू सिंह बडनग़र ने लिखा है कि युवराज के सात रानियां थीं। इसे बाजदारी का शौक रहा। सूरतखाने में मौजूद सभी चित्रों में किशन सिंह के हाथ में बाज है। बाजदारी शहजादों और अमीरों का शौक था। महाकवि बिहारी, कुलपति मिश्र, प्राणनाथ श्रोत्रिय, खड्गसेन आदि विद्वानों से किशन सिंह ने अरबी, संस्कृत आदि की शिक्षा ग्रहण की।
जनार्दन भट्ट ने युवराज के गुणों पर किशन विलास ग्रंथ लिखा, जिसमें नीति के 710 दोहे लिखे। औरंगजेब ने युवराज को शाही मनसब भी दे दिया था। औरंगजेब के एक फरमान में किशन सिंह को शाही दरबार में हाजिर होने का लिखा है। औरंगजेब ने अफगानिस्तान में तीन साल रहने के लिए किशन सिंह को आमेर जाने की छुट्टी दी। युवराज ने जयगढ़ किले में जल कुंड बनवाया। ईश्वर विलास महाकाव्य में किशनसिंह की तुलना कार्तिकेय के समान की गई है। किशन सिंह की भौमिया के रूप में पूजा की जाती है। ( Demo Pic Attached )