जयपुर

एक-दूसरे से जुड़ेंगे 79 बांध, पानी के साथ आएगी खुशहाली, होगी आर्थिक तरक्की

Eastern Rajasthan Canal Project: राज्य में ईआरसीपी (पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना) के तहत नदियों को जोड़ने का काम चल रहा है। इसी में 79 बांधों को भी जोड़ने का प्लान है, जिससे एक बांध से दूसरे दूसरे बांध तक पानी पहुंचाया जा सके।
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Aug 18, 2023
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जयपुर। Eastern Rajasthan Canal Project: राज्य में ईआरसीपी (पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना) के तहत नदियों को जोड़ने का काम चल रहा है। इसी में 79 बांधों को भी जोड़ने का प्लान है, जिससे एक बांध से दूसरे दूसरे बांध तक पानी पहुंचाया जा सके। इसमें पहले 26 बांध शामिल थे और कुछ दिन पहले ही 53 बांध और जोड़े गए हैं। हालांकि, सात वर्ष पहले नदियों की तरह ही बांधों ग्रिड सर्किट तैयार करने की योजना तैयार की गई थी, लेकिन सब कुछ 'सियासत' के भेंट चढ़ गया। यही कारण है कि पिछले दिनों घग्घर नदी में हरियाणा से आ रहे पानी के कारण हनुमानगढ़ में बाढ़ जैसे हालात बन गए।

विषय विशेषज्ञों का मानना है कि टुकड़ों में बांधों को जोड़ने की बजाय इनका पूरा एक सर्किट बन जाए तो पानी की कमी से जूझ रहे प्रदेश के लिए यह योजना मील का पत्थर साबित होगी। इससे एक बड़े बांध को दो से तीन छोटे बांध से भी जोड़ा जा सकता है।

बांध से बांध जुड़ें तो यह फायदा
-ओवरफ्लो हो रहे बांध का पानी व्यर्थ नहीं बहेगा और न ही इससे आस-पास के गांव खाली कराने की नौबत आएगी। अभी ज्यादातर बड़े बांध के भरने के बाद गेट से पानी छोड़ने से पहले गांव खाली कराए जाते रहे हैं। इससे फसलें भी बर्बाद होती है।
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-खाली बांध में पानी पहुंचने से स्थानीय लोगों की पेयजल व सिंचाई से समस्या दूर हो सकेगी।

-बांध से बांध को जोड़ने के लिए जिस रूट से नदी, नहर गुजरेगी, उस रूट पर कृषि का दायरा बढ़ेगा।

-औद्याेगिक गतिविधियां बढ़ने की स्थितियां बनेगी, क्योंकि कई उद्योगों को पानी की ज्यादा जरूरत होती है। इससे इलाके का इकोनामिक डवलपमेंट भी होगा।

ये छोटे-बड़े 79 बांध जुड़ेंगे
-अलवर- जयसमंद, घामरेड, घाटपिक
-भरतपुर- बारेठा, सिकारी, अजन लोअर, अजन अपर,
-बूंदी- चाकन
-दौसा- मोरल, सैंथलसागर, सिनोली, झिलमिल, गेताेलाव, चंदराना, भंडारी, माधोसागर, जगरामपुरा, बिनाेरीसागर, राहुवास, सिंथौली
-गंगापुरसिटी- फतेसागर, महसवा, विशनसमंद, मोहनपुरा, रायसाना, रौंनसी, नाजीमवाला कुजेला, बोनी, चंदापुरा, बनियावाला, मोतीसागर, टोक्सी, तेलनवाला, नयातालाब सिरोली, नयातालाब सेवा, कांदिप, जेवाली, डोब, खिदारपुर, जौहरीवाला, रामतालाब
-करौली- जलसेन, जटवाडा, कायराडा
-धौलपुर- पार्वती, रामसागर, तालाबशाही, उर्मिलासागर
-जयपुर- रामगढ़ बांध, कालख, कानोता, छापरवाड़ा
-करौली- कालीसिल, पांचना, जग्गर
-सवाईमाधोपुर- मूई, पांचोलास, सुरवाल, धील, मोरसागर, आकोदिया, नागतलाई, गंदाल, लिवाली, नागोलाव, गुडाला, सौभागसागर, रानीला, पिपलाई, ईसरदा
-टोंक- ठिकरिया, कुम्हारिया, गालवा, गलवानिया, माशी, टोरडीसागर, बीसलपुर
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फैक्ट फाइल
-690 बांध हैं प्रदेश में
-22 बांध बड़े हैं यहां इनमें से
-256 बांध मध्यम स्तर के
-412 बांध लघु स्तर के हैं

-स्टेट वाटर ग्रिड के तहत बांध का सर्किट तैयार करने का प्लान बनाया गया था। इसमें ज्यादा ऐसे बांध थे, जिनसे एक साथ 15 से ज्यादा जिले लाभान्वित होते। बांधों को एक-दूसरे से जोड़ते ही पेयजल, सिंचाई के लिए पानी की परेशानी काफी हद तक दूर होगी। क्षेत्रों का आर्थिक विकास भी होगा। -विनोद शाह, सेवानिवृत मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग

-प्रदेश में जो बांध एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, वहां पानी की उपयोगिता बढ़ गई है। इससे स्थानीय लोगों को फायदा हुआ है। अभी उन बांधों को जोड़ना बेहतर होगा, जहां कम से कम मानसून में पानी की आवक होती रहे। चम्बल के पानी से कई बांधों को भरा जा सकता है। इस पर काम भी चल रहा है। -के.डी. सांदू, सेवानिवृत मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग

Published on:
18 Aug 2023 07:26 am