सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों में कमियों को लेकर जहां जयपुर में कर्मचारी संगठन ने आक्रोश जाहिर किया। तो वहीं अन्य जिलों से भी विरोध किया गया।
प्रदेश की सरकार की ओर से भले ही राज्य कर्मचारियों के लिए 7th Pay Commission को लागू कर दिया है, लेकिन इन नए वेतनमान में आई विसंगतियों के कारण कर्मचारी संगठनों द्वारा इन दिनों विरोध देखने को मिल रहा है। राज्यभर के अलग-अलग जिलों में कर्मचारी संगठन इसके खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं, तो कई संगठनों ने इसे सरकार की वादाखिलाफी करार दिया है। वहीं संगठनों ने एरियर नहीं देने, वेतन कटौती समेत कई अन्य मुद्दों को पूरा नहीं करने पर नाराजगी जाहिर करते हुए इसे एक छलावा बताया है।
पिछले दिनों सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों में कमियों को लेकर जहां जयपुर में कर्मचारी संगठन ने आक्रोश जाहिर किया, तो वहीं इसके बाद प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में इसे लेकर विरोध-प्रदर्शन तेज हो गया, कहीं जलाई जा रही हैं प्रतियां तो कहीं कर्मचारी संगठन राज्य सरकार को दे रहे हैं आंदोलन की धमकी। एक नजर राज्यभर में 7th Pay Commission को लेकर चल रहे विरोध पर...
प्रदेश में यहां हो रहा सातवें वेतन को लेकर विरोध-प्रदर्शन...
जयपुर- बीते दो दिन पहले राजधानी जयपुर में सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लेकर कर्मचारी संगठनों ने अपनी बात रखते हुए इसे सरकार की वादाखिलाफी करार दिया। जबकि अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ अपनी आवाज बुदंल की। साथ ही अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ एकीकृत के प्रदेशाध्यक्ष गजेन्द्र सिंह राठौड़ ने कहा कि आयोग को लेकर राज्य कर्मचारियों को जैसी आशंकाएं थी, उसी के अनुरूप राज्य सरकार ने नोटिफिकेशन जारी किया है। तो वहीं राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ के प्रदेश महामंत्री तेज सिंह राठौड़ ने सरकार पर पुराने समझौते तोडऩे का आरोप लगाया। कर्मचारियों का कहना है कि पर्सनल पे से कुछ नहीं होगा, सरकार ने उनके इंक्रीमेंट समेत कई अन्य तरह का नुकसान किया है।
जोधपुर- यहां के राज्य कर्मचारी संगठनों में वेतन आयोग की सिफारिशों को लेकर काफी आक्रोश को देखने को मिला। जबकि उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का यह सातवां वेतन आयोग केवल एक छलावा है। राज्य सरकार ने 21 माह का आर्थिक लाभ न देकर छलावा किया है। कर्मचारी संघठन के नेताओं ने कहा कि राज्य सरकार ने 7वां वेतन आयोग केन्द्र के समान 1 जनवरी 2016 से देने के बजाय 1 अक्टूबर 2017 से लागू कर राजस्थान के 7 लाख से अधिक कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान पहुंचाया है।
तो वहीं रेसा-पी के कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष डॉ. राजूराम चौधरी ने बताया कि छठे वेतन आयोग में स्कूल व्याख्याता का वेतन 18750 था, 7वें वेतन आयोग में इस आधार पर 48400 होना चाहिए था, लेकिन सरकार ने 44300 कर दिया। रेसला व रेसा-पी इसका विरोध करता है। कर्मचारी नेता शिव कुमार कल्ला ने बताया कि सरकार-कर्मचारियों के बीच सामंजस्य जरूरी है, फिलहाल कर्मचारियों में असंतोष है। बकाया एरियर नहीं मिला तो आंदोलन होगा।
पाली- यहां रायपुर मारवाड़ में सातवें वेतन आयोग की अधिसूचना को लेकर कार्मिकों में गहरा आक्रोश दिखा। कर्मचारियों ने इसे छलावा बताते हुए सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी की बात कर रहे हैं, जबकि बुधवार को यहां उपखण्ड अधिकारी कार्यालय के बाहर कार्मिकों ने सरकार के अधिसूचना आदेश की होली जला मुख्यमंत्री के खिलाफ नारेबाजी कर आक्रोश जताया। इस दौरान बड़ी संख्या में कार्मिक मौजूद थे। उनका कहना कि सरकार ने उनके साथ ऐसा छलावा कर कुठाराघात किया है। साथ ही राज्य सरकार पर कई आरोप भी लगाए।
कोटा- सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के विरोध में कर्मचारियों ने जिला कलक्टर पर प्रदर्शन किया। साथ ही वेतन आयोग के आदेशों की होली जलाई। वहीं सरकार से मांग की है कि केंद्रीय कर्मचारियों व अधिकारी केडर के अनुसार उन्हें सातवें वेतन आयोग का लाभ दिया जाना चाहिए। तो वहीं इस प्रदर्शन में शामिल राज्य कर्मचारी महासंघ के जिलाध्यक्ष नजीम पठान ने कहा कि केंद्रीय कर्मचारियों, राज्य सेवा के अधिकारियों के समान कर्मचारियों, सहायक कर्मचारियों को भी उनका हक मिलना चाहिए। इसके लिए प्रदेश के सभी कर्मचारियों को भले ही सड़क पर क्यों न उतरना पड़े वो इसके लिए भी तैयार हैं।
बीकानेर- यहां राज्य सरकार द्वारा लागू किए गए सातवें वेतनमान को लेकर कर्मचारी जगत रोष देखने को मिला। बीते दिन मंगलवार को राज्य सरकार पर आरोप लगाते हुए कर्मचारी संगठनों ने सातवें वेतनमान को तोड़-मरोड़ कर लागू करने और कर्मचारियों को देय वेतनमान में भारी कटौती थोपकर नुकसान पहुंचाने वाला बताया। अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ जिला शाखा के अध्यक्ष जयकिशन पारीक ने राज्य सरकार पर राज्य कर्मियों का 22 माह का एरियर नहीं देकर नुकसान पहुंचाने की बात की।