
मोहित शर्मा.
Azadi Ka Amrit Mahotsav: जयपुर. क्या आपने कभी सोचा है कि मोटू का पेट और पतलू की चालाकी न सिर्फ हंसी-मजाक का कारण बनेगी, बल्कि देश के आर्थिक विकास का आधार भी सिखाएगी? लेकिन हां, अब ऐसा होने जा रहा है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) और आयकर विभाग ने मिलकर एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। 'आजादी का अमृत महोत्सव' के तहत लॉन्च की गई 8 कॉमिक बुक श्रृंखला में लोकप्रिय कार्टून जोड़ी मोटू-पतलू बच्चों को इनकम टैक्स, जीएसटी और कर जागरूकता के महत्वपूर्ण पाठ पढ़ाएगी, वो भी पूरी तरह मनोरंजक अंदाज में। सीबीएसई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "बच्चों को किताबी ज्ञान से ज्यादा कार्टून से जोड़ना आसान है। यह सीरीज न सिर्फ जागरूकता बढ़ाएगी, बल्कि भविष्य के जिम्मेदार नागरिक तैयार करेगी।"
यह पहल स्कूली बच्चों में कर साक्षरता (टैक्स लिटरेसी) को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई है। आयकर विभाग के निदेशालय (टैक्सपेयर सर्विसेज-2) द्वारा प्रकाशित ये कॉमिक्स हिंदी, अंग्रेजी, तमिल, तेलगू और गुजराती ५ भाषाओं में उपलब्ध हैं। हर किताब में मोटू-पतलू की शरारतों के जरिए बताई गई हैं कर चुकाने की जिम्मेदारी, देश के विकास में टैक्स की भूमिका और सरल भाषा में टैक्स सिस्टम के बुनियादी नियम। हर कॉमिक्स में भूल भुलैया और रंग भरो प्रतियोगिता भी दी गई है। जीएसटी और इनकम टैक्स आदि के समझाया गया कि कैसे ये कर देश को मजबूत बनाते हैं।
सीबीएसई ने अपने सभी संबद्ध स्कूलों से अपील की है कि वे इन कामिक्स को छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों तक पहुंचाएं और इन्हें कक्षा गतिविधियों व सह-पाठयक्रम कार्यक्रमों में शामिल करें ताकि छात्रों में टैक्स अनुपालन और नागरिक जिम्मेदारी की समझ विकसित की जा सके। इन कामिक्स का उद्देश्य बच्चों को कर व्यवस्था की बुनियादी समझ सरल और मनोरंजक तरीके से देना है। देश के प्रिय कार्टून पात्र मोटू और पतलू अब बच्चों को यह बताएंगे कि टैक्स कैसे देश के विकास में अहम भूमिका निभाता है, चाहे वह सडक़ और अस्पताल हों या स्कूल और अन्य बुनियादी ढांचे। यह आठ भागों वाली श्रृंखला आयकर विभाग के जनसंपर्क, प्रकाशन और प्रचार निदेशालय द्वारा प्रकाशित की गई है। प्रत्येक कहानी में मोटू और पतलू रोजमर्रा की स्थितियों से गुजरते हुए बच्चों को यह समझाते हैं कि टैक्स देना क्यों जरूरी है और इससे देश को क्या लाभ होता है।