जयपुर

Jaipur: एक्टर सलमान खान को नहीं मिली राहत, राज्य उपभोक्ता आयोग के इस आदेश ने बढ़ाई मुश्किलें

Misleading Advertisement Case: पान मसाला के भ्रामक विज्ञापन के एक मामले में अभिनेता सलमान खान की मुश्किलें बढ़ गई हैं। आयोग ने विज्ञापन के एक मामले में अभिनेता सलमान खान व पान मसाला कंपनी को राहत देने से इनकार कर दिया।

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Mar 17, 2026
अभिनेता सलमान खान, पत्रिका फाइल फोटो

Misleading Advertisement Case: पान मसाला के भ्रामक विज्ञापन के एक मामले में अभिनेता सलमान खान की मुश्किलें बढ़ गई हैं। राज्य उपभोक्ता आयोग ने केंद्र व राज्य सरकार को भ्रामक विज्ञापनों के मामले केवल केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) के स्थान पर राज्य उपभोक्ता आयोगों के दायरे में लाने के लिए कानूनी संशोधन करने की सिफारिश की है।

आयोग ने विज्ञापन के एक मामले में अभिनेता सलमान खान व पान मसाला कंपनी को राहत देने से इनकार कर दिया। आयोग अध्यक्ष देवेन्द्र कच्छावाहा, न्यायिक सदस्य अरुण कुमार अग्रवाल व सदस्य लियाकत अली की पीठ ने सलमान खान व राजश्री पान मसाला कंपनी की निगरानी याचिकाओं को खारिज कर दिया।

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याचिका में आदेशों को दी चुनौती

इन याचिकाओं में जिला उपभोक्ता आयोग जयपुर-द्वितीय के उन आदेशों को चुनौती दी गई, जिनमें सलमान खान को पान मसाला कंपनी का कथित भ्रामक विज्ञापन करने से रोका गया था और प्रार्थना पत्र में सलमान खान के हस्ताक्षर के बारे में मौका कमिश्नर राजेश कुमार मीना से रिपोर्ट मांगने को कहा गया था।

सलमान खान की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रवि प्रकाश व पान मसाला कंपनी की ओर से अधिवक्ता वरूण सिंह ने जिला आयोग के आदेशों को खारिज करने का आग्रह करते हुए कहा कि भ्रामक विज्ञापन के मामले में सीसीपीए या उसके प्राधिकृत अधिकारी की ओर से ही परिवाद पेश किया जा सकता है। इसके अलावा जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर करने वाला व्यक्ति उपभोक्ता की परिभाषा में भी नहीं आता। उधर, परिवादी अधिवक्ता योगेन्द्र सिंह बडियाल ने जिला आयोग के आदेशों का समर्थन किया।

उपभोक्ता के पास भी हो अधिकार

राज्य आयोग ने कहा कि परिवाद पर सुनवाई के संबंध में विचार करने का अधिकार जिला आयोग का है। इसके अलावा उपभोक्ता के अधिकारों को लेकर भ्रामक विज्ञापनों के संबंध में सीसीपीए कोई कार्रवाई नहीं करता, इसका मतलब यह नहीं है कि उपभोक्ता के पास कोई अधिकार ही नहीं रह गया है।

आयोग ने दिल्ली स्थित सीसीपीए को लेकर यह भी कहा कि भारत जैसे विशाल देश में केवल एक स्थान पर और एक ही संस्था को परिवाद पेश करने का अधिकार देने पर विधायिका को पुनर्विचार करना चाहिए। राज्य उपभोक्ता आयोगों व उसकी पीठों को सीधे परिवाद पेश करने का अधिकार देने वाले प्रावधान कानून में जोड़े जाने चाहिए। आम जनता को सुलभ व भी सस्ता न्याय दिलाने के प्रावधान कानून में जोड़े जाने चाहिए।

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