17 मार्च 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

GST में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा; दोपहिया,स्क्रैप और चोरी के वाहनों के नाम पर ई-वे बिल से सरकार को करोड़ों की चपत

GST Fraud: दोपहिया, सरेंडर किए हुए, निलंबित, स्क्रैप किए गए या चोरी के वाहनों से माल ढुलाइ का बड़ा मामला सामने आया है। इनके नाम पर ई-वे बिल जारी करवाकर जीएसटी रियायत ली जा रही है, जिससे सरकार को करोड़ों रुपए राजस्व का नुकसान हो रहा है।

2 min read
Google source verification
सीएजी ने पकड़ा जीएसटी में फर्जीवाड़ा, फोटो मेटा एआइ

सीएजी ने पकड़ा जीएसटी में फर्जीवाड़ा, फोटो मेटा एआइ

GST Fraud: दोपहिया, सरेंडर किए हुए, निलंबित, स्क्रैप किए गए या चोरी के वाहनों से माल ढुलाइ का बड़ा मामला सामने आया है। इनके नाम पर ई-वे बिल जारी करवाकर जीएसटी रियायत ली जा रही है, जिससे सरकार को करोड़ों रुपए राजस्व का नुकसान हो रहा है। नियंत्रक महालेखापरीक्षक (सीएजी) ने फर्जीवाड़े का खुलासा कर ई-वे बिल प्रणाली में सत्यापन व्यवस्था लागू करने की सिफारिश की है।

बजट सत्र में रिपोर्ट पेश

सीएजी की यह रिपोर्ट विधानसभा के बजट सत्र में पेश की गई। जीएसटी नियमों में प्रावधान है कि स्वयं के, किराए के या सार्वजनिक वाहन से सड़क मार्ग से माल ढुलाइ के लिए पंजीयन कर ई-वे बिल जारी किया जाएगा, जो वाहन चालक के पास होना अनिवार्य है।

सीएजी रिपोर्ट के अनुसार इन नियमों के अंतर्गत ऐसे वाहनों के लिए भी ई-वे बिल जारी कर दिए गए, जो दोपहिया वाहन थे या चोरी के वाहन थे। इनके अलावा निलंबित वाहन, सरेंडर किए गए वाहन, स्कैप किए जा चुके वाहन या पंजीयन रद्द हो चुके वाहनों के नाम से भी ई-वे बिल जारी किए गए। ई-वे बिल माल ढुलाइ से पहले पोर्टल पर जनरेट किया जाना आवश्यक है।

सरकार ने किया चौंकाने वाला खुलासा

  • दोपहिया वाहन मामला-सरकार ने कहा, एक मामले में बताए स्थान पर व्यावसायिक गतिविधि नहीं पाए जाने पर करदाता का पंजीयन निरस्त, जबकि दूसरे मामले में नोटिस जारी। इस पर सीएजी ने सवाल किया कि ई-वे बिल से व्यावसायिक गतिविधि तो हुई है।
  • सरेंडर किए गए वाहन का मामला- सरकार ने कहा कि एक प्रकरण में पंजीयन निरस्त कर आइटीसी छूट की जांच की जा रही है, जबकि दूसरे प्रकरण में सीजीएसटी प्राधिकरण ने सर्वे एवं तलाशी की कार्रवाई पूरी कर ली।
  • निरस्त पंजीयन वाले वाहन का मामला- सरकार ने कहा कि करदाता सरकारी अस्पताल में दवाइयों की आपूर्ति करता है, जो करमुक्त है। सीएजी ने कहा कि सरकार के उत्तर में संदिग्ध वाहन के उपयोग के संबंध में काेई उल्लेख नहीं है।

सीएजी ने की सिफारिश

विभाग इन मामलों में विवरणियों की जांच कर न गलती पकड़ पाया और न सुधार करवा पाया। ऐसे में राज्य सरकार एनआइसी के सहयोग से ई-वे बिल प्रणाली में सत्यापन व्यवस्था लागू कर सकती है, जिससे नियमों का दुरुपयोग रोका जा सके।