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RGHS : राजस्थान में महंगी है हियरिंग ऐड, आरजीएचएस की मदद नाकाफी, जानिए कम सुनने वाले बुजुर्गों का दर्द

RGHS : राजस्थान में हियरिंग ऐड की ऊंची कीमतें पेंशनर्स की जेब पर भारी पड़ रही हैं। आरजीएचएस के तहत मरीजों को हियरिंग ऐड खरीदने पर सीमित पुनर्भरण मिलता है, जबकि बाजार में उपलब्ध डिजिटल मशीनों की कीमत इससे कई गुना अधिक है। जानिए कम सुनने वाले बुजुर्गों का दर्द।

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ग्राफिक्स फोटो पत्रिका

RGHS : उम्र बढ़ने के साथ होने वाला बहरापन आज बुजुर्गों के लिए आम समस्या बनता जा रहा है, लेकिन इसका उपचार करने के लिए जरूरी हियरिंग ऐड की ऊंची कीमतें पेंशनर्स की जेब पर भारी पड़ रही हैं। राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (आरजीएचएस) के तहत मरीजों को हियरिंग ऐड खरीदने पर सीमित पुनर्भरण मिलता है, जबकि बाजार में उपलब्ध डिजिटल मशीनों की कीमत इससे कई गुना अधिक है।

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार बढ़ती उम्र के साथ सुनने की क्षमता कम होना सामान्य प्रक्रिया है। ऐसे में दवा की बजाय हियरिंग ऐड ही प्रभावी विकल्प माना जाता है। लेकिन डिजिटल तकनीक वाली आधुनिक मशीनें आम बुजुर्गों की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं। वर्तमान में बाजार में डिजिटल हियरिंग ऐड की कीमत 15 से 20 हजार रुपए से शुरू होकर 80–90 हजार या इससे भी अधिक तक पहुंच जाती है।

दूसरी ओर आरजीएचएस में अधिकृत विशेषज्ञ की सलाह पर मरीज को पहले अपने स्तर पर मशीन खरीदकर भुगतान करना पड़ता है। इसके बाद ऑनलाइन दस्तावेज जमा कराने पर कान के पीछे लगने वाली मशीन पर अधिकतम 8 हजार और कान के अंदर वाली मशीन पर अधिकतम 9 हजार रुपए का ही भुगतान मिलता है।

पुराने को मॉडल सूची से हटाया

हाल ही डोरी वाली पॉकेट मॉडल और नॉन-डिजिटल (एनालॉग) हियरिंग ऐड को सीजीएचएस के साथ-साथ आरजीएचएस की सूची से भी हटा दिया गया है। ऐसे में अब मरीजों के पास डिजिटल मशीनें ही विकल्प के रूप में बची हैं। पेंशनर्स का कहना है कि सरकार आरजीएचएस के तहत अधिकृत दवा विक्रेताओं से दवाओं पर तय छूट लेती है। उसी तरह हियरिंग ऐड पर भी योजना के लाभार्थियों के लिए तय डिस्काउंट की व्यवस्था की जा सकती है। फिलहाल स्थिति यह है कि कुछ विक्रेता अपने स्तर पर छूट दे देते हैं, जबकि कई जगहों पर राहत नहीं मिलती।

तीन साल की वारंटी अनिवार्य

मरीजों की परेशानी यह भी है कि योजना के नियमों के अनुसार मशीन पर कम से कम तीन साल की वारंटी अनिवार्य है। लेकिन इतनी वारंटी के साथ 8-9 हजार रुपए में हियरिंग ऐड मिलना मुश्किल है। ऐसे में कीमत और मिलने वाले पुनर्भरण के बीच का अंतर बुजुर्गों को जेब से ही भरना पड़ता है।

हियरिंग ऐड ही सबसे बेहतर उपाय

65 वर्ष की उम्र में हर तीन में से एक व्यक्ति और 75 की उम्र में हर दूसरे व्यक्ति को सुनने में परेशानी होने लगती है। इसके इलाज में दवाएं अधिक प्रभावी नहीं होतीं, इसलिए जरूरत पड़ने पर हियरिंग ऐड ही सबसे बेहतर उपाय होता है।
डाॅ. शुभकाम आर्य, ईएनटी विशेषज्ञ