जयपुर

आखिर करोड़ों जब्त रुपए का ED आखिर करती क्या है?

पश्चिम बंगाल में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पिछले दिनों कार्रवाई की। कार्रवाई में मंत्री के घर से लेकर मंत्री की करीबी मित्र अर्पिता मुखर्जी के बाथरूम तक में करोड़ों रुपए मिले हैं। यह पैसे इतने हैं कि देश में हर कोई हैरान है। मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून हुई कार्रवाई में करीब 50 करोड़ रुपये कैश बरामद किए जा चुके हैं। इससे पहले झारखंड में अवैध खनन के मामले में 36 करोड़ रुपए जब्त किए। मई में झारखंड की आईएएस पूजा सिंघल के सीए के घर से 17 करोड़ कैश बरामद किया गया था।

2 min read
Jul 30, 2022

पश्चिम बंगाल में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पिछले दिनों कार्रवाई की। कार्रवाई में मंत्री के घर से लेकर मंत्री की करीबी मित्र के बाथरूम तक में करोड़ों रुपए मिले हैं। यह पैसे इतने हैं कि देश में हर कोई हैरान है। मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून हुई कार्रवाई में करीब 50 करोड़ रुपये कैश बरामद किए जा चुके हैं। इससे पहले झारखंड में अवैध खनन के मामले में 36 करोड़ रुपए जब्त किए। मई में झारखंड की आईएएस पूजा सिंघल के सीए के घर से 17 करोड़ कैश बरामद किया गया था।

ऐसे में अब हर किसी के मन में सवाल उठ रहा है कि आखिर इतना पैसा मिलने के बाद प्रवर्तन निदेशालय इन जब्त पैसों का करता क्या है। क्या इसे अपने पास रखता है, या फिर इससे वेतन देने में प्रयोग करता है या किसी कार्य में प्रयोग करता है। तो हम आपको यह रहस्य बताएंगे कि आखिर जब्ती के बाद प्रर्वतन निदेशालय इन पैसों का क्या प्रयोग करता है। इसके प्रयोग के लिए क्या प्रक्रिया ईडी अपनाता है।

जब्त पैसा होता है बैंक में फिक्स
प्रवर्तन निदेशालय जब्त पैसों को पहले अपने पास लाता है और फिर इसे अपने बैंक एकाउंट में जमा कराता है। इसे बात इस पूरे पैसे को फिक्सड डिपाजिट में बदल दिया जाता है। इस बात को पूरी तरह से लिखा जाता है किसका कितना पैसा जब्त है ताकि केस पलट जाने पर वापसी में दिक्कत न हो।


दोषी साबित तो पैसा भारत सरकार का
प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई में अगर किसी का दोष न्यायाल में सिद्ध हो जाता है तो उस पैसे को निदेशालय भारत सरकार के खाते में स्थानांतरित कर देती है। फिर सरकार अपने हिसाब से प्रयोग कर सकती है। इसके अलावा अगर कोई पीड़ित है तो उसे भी इसमें से पैसे दिए जाते हैं। जैसे विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चोकसी ने देश के सरकारी बैंकों को 22 हजार करोड़ लेकर जब भागे तो जो जब्ती निदेशालय ने की उसमें से 15 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति बैंकों को दी है। अब इस मामले में निदेशालय न 19 हजार करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति अटैच की है।

दोषी नहीं तो न्यायालय के आदेशानुसार वापसी
न्यायालय में अगर दोष साबित नहीं हुआ तो फिर प्रवर्तन निदेशालय को पैसा वापस करना होगा। वह भी 1995 में एक व्यापारी से विदेशी लेनदेन कानून के उल्लंघन के आरोप में 7.95 लाख रुपये जब्त किए गए थे।दोष साबित नहीं हुआ। दिल्ली हाईकोर्ट ने 6 फीसदी ब्याज सहित करीब 20 लाख रुपए भुगतान का आदेश दे दिया।

मकान और फैक्ट्री का क्या करती है ईडी
अगर कोई मकान है तो प्रवर्तन निदेशालय उस ताला लगाकर बंद कर देता है। कोई फैक्ट्री है तो उसे अपने अधिकार में लेकर लाभ को अपने हिस्से में ले लेता है। फैक्ट्री को बंद इसलिए नहीं किया जाता क्योंकि उससे कई लोगों का रोजगार जुड़ा हुआ होता है।


चार मामले में प्रवर्तन निदेशालय करता है कार्रवाई

प्रवर्तन निदेशालय चार मामलों में कार्रवाई करता है। पहला है प्रीवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट 2002 यानी PMLA यानी जो पैसा आप हेराफेरी से कमाते हैं और स्रोत का पता नहीं रहता है। दूसरी कार्रवाई फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट 1999 यानी FEMA के तहत कार्रवाई की जाती है। इसमें विदेशी पैसा जुड़ा रहता है। इसके अलावा फ्यूजिटिव इकनॉमिक ऑफेंडर्स एक्ट, 2018 (FEOA) और कंजर्वेशन ऑफ फॉरेन एक्सचेंज एंड प्रीवेंशन ऑफ स्मगलिंग एक्टिविटीज एक्ट, 1974 (COFEPOSA) में निदेशालय कार्रवाई करता है।

Published on:
30 Jul 2022 09:31 pm
Also Read
View All