हमें डराना नहीं बस मिलकर कोरोना को हराना है
जयपुर. भीलवाड़ा. कोरोना का मुख्य केंद्र बने भीलवाड़ा में महात्मा गांधी जिला अस्पताल का आइसोलेशन वार्ड देश में सबसे बड़ा है। इसमें करीब 200 बेड हैं जबकि 20 से ज्यादा मरीज भर्ती हैं। इस वार्ड की खासियत है कि यहां भर्ती मरीजों में से अधिकांश नर्सिंग स्टाफ व डॉक्टर हैं। इनमें भीलवाड़ा के निजी अस्पताल के एक डॉक्टर भी हैं।
कोरोना संक्रमित ये डॉक्टर दोबारा जांच में नेगेटिव पाए गए हैं। हालांकि, अभी वे आइसोलेशन वार्ड में भर्ती हैं। उनकी एक और जांच होगी। फिर उन्हें क्वारंटीन वार्ड में शिफ्ट किया जाएगा। फिर होम आइसोशन में रहेंगे। वार्ड में भर्ती ये डॉक्टर अन्य मरीजों के साथ नर्सिंग स्टाफ का भी हौसला बढ़ाते रहे। राजस्थान पत्रिका से उन्होंने मोबाइल फोन पर बातचीत की और अपना अनुभव बताया। देश को उन्होंने बचने का संदेश भी दिया।
शुरू में डर लगा था
अस्पताल में आए मरीज का इलाज डॉक्टर का कर्तव्य है। हमने भी वही किया। अब कौन रोगी कोरोना संक्रमित था, यह अलग बात है लेकिन जैसे ही लगा कि कोरोना के लक्षण है तो तुरंत महात्मा गांधी अस्पताल में भर्ती हो गए। शुरू में डर लगा।
वजह भी थी
आखिर यह वैश्विक महामारी है लेकिन पेशे से डॉक्टर हंू तो खुद सावधानियां रखी। धीरे-धीरे सब नॉर्मल लगने लगा।
घर से न निकलें
संक्रमण से बचने के लिए एक ही मूलमंत्र है कि घरों से न निकलें। संक्रमित से दूर रहना ही बचाव है। मैं खुद डॉक्टर हूं। अच्छे से जानता हूं कि यहां अच्छा उपचार चल रहा है और मेरी रिपोर्ट भी अब नेगेटिव आ चुकी है। कुछ समय बाद हम आपके बीच में आ-जा सकेंगे। अभी आपको लॉकडाउन की पालना करनी होगी। सेनेटाइज करना जरूरी है।
किस्से सुना कर समय गुजार रहे
संक्रमण को हरा चुके डॉक्टर ने बताया कि कोरोना वायरस से यहां का स्टाफ भी डरा हुआ था। पर हम सबने मिलकर मोटिवेट किया। अभी कोई गाना गाकर तो कोई पुराने किस्से सुनाकर समय गुजार रहा है। अच्छी बात यह है कि सब मिलजुलकर काम कर रहे हैं। एक ही बात कहूंगा कि ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है। बस, चिकित्सा विभाग की गाइडलाइन की पालना करनी होगी। यदि सब मिलकर ऐसा करेंगे तो कोरोना के खिलाफ जंग जीत लेंगे।