
Air India flight Air Turbulence Case : थाईलैंड के फुकेट से दिल्ली आ रही एअर इंडिया फ्लाइट AI 2379 मंगलवार 4 अगस्त को टर्बुलेंस, यानी तेज हवा के झटकों में फंस गई। फ्लाइट अचानक 300 फीट तक नीचे आ गई। घटना में 13 यात्री और 4 क्रू मेंबर्स समेत 17 लोग घायल हुए थे। इस एअर इंडिया फ्लाइट में जयपुर के श्रीकांत झा व रेनू रानीवाला अपने परिवार के साथ यात्रा कर रहीं थी। श्रीकांत झा व रेनू रानीवाला ने दौरान घटित अपने खौफनाक अनुभव को साझा किया।
4 अगस्त को एयर इंडिया की फुकेत-दिल्ली फ़्लाइट में ज़बरदस्त एयर टर्बुलेंस (हवा के झटकों) का सामना करने वाले एक यात्री जयपुर के श्रीकांत झा का कहना है, "हमें असल में पायलट के बर्ताव और हाव-भाव को देखकर ही शक हो गया था। उनके चलने का तरीका ठीक नहीं लग रहा था और टर्बुलेंस के बाद जिस तरह से उन्होंने बात की, उससे ऐसा लगा कि वे नशे में थे। यह बहुत गैर-ज़िम्मेदाराना हरकत है। यह सिस्टम की नाकामी है।
श्रीकांत झा ने कहा कि एक पायलट नशे में फ़्लाइट उड़ाने की हिम्मत कर सका, यह जानते हुए भी कि वह शायद बिना पकड़े गए एयरपोर्ट से निकल सकता है। उसे पता था कि वह यहां बच सकता है हालांकि, हमने टर्मिनल-3 के हेड रविशंकर गौर के पास कड़ी शिकायत दर्ज कराई। साथ ही अधिकारियों से डोप और ब्लड टेस्ट कराने की मांग की, जिससे सच सामने आया। DGCA, एयरपोर्ट अथॉरिटी और एयरलाइंस को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
एयर इंडिया फ़्लाइट के ज़बरदस्त एयर टर्बुलेंस का सामना करने वाली यात्री जयपुर निवासी रेनू रानीवाला कहती हैं कि हमारे आगे बैठे व्यक्ति ने पहले ही कहा था कि पायलट ठीक से चल भी नहीं पा रहा था। जब फ़्लाइट नीचे गिरने लगी, तो मुझे बच्चों की सबसे ज़्यादा चिंता हुई। मेरा पोता मेरे बगल में बैठा था, इसलिए मैंने उसे कसकर पकड़ लिया और उसकी सीट बेल्ट लगा दी। इस दौरान, सीट का हैंडल मेरे शरीर में चुभ गया, जिससे मेरी दो पसलियां घायल हो गईं। उन्होंने कहा कि मेरे पति तो एकदम हवा में ही चले गए थे। मैंने जब जोर जोर से उनका नाम लिया तो वह होश में आए। तब वो सीट पर आकर बैठे। तमाम परिवारों की जिंदगियां दांव पर लगी हुई थी।
रेनू रानीवाला ने बताया कि एक तीन साल की एक बच्ची उछलकर पीछे जा गिरी। आप इतनी बड़ी कंपनी चलाते हैं, आपको सच में ज़्यादा जिम्मेदार होने की जरूरत है। लैंडिंग के बाद भी कोई परवाह नहीं की गई। दो-तीन घंटे तक किसी ने हमारी सुध नहीं ली। यहां तक कि जब हमें अस्पताल ले जाया गया, तो वहां भी हमारी देखभाल करने वाला कोई नहीं था।
रेनू रानीवाला ने बताया कि मेरे बच्चों तो अब फ्लाइट से यात्रा करने से मना कर रहे हैं। उनका विश्वास टूट गया है। हम भी एक विश्वास के सहारे ही यात्रा करते हैं। पर इस घटना ने हमारे मनोबल को तोड़ दिया है। आगे हमे देखाना होगा।