रीज को एलर्जी से होने वाले खतरे से बचने की सलाह
जयपुर . सांगानेर आमतौर पर घुटनों की ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी में मेटल के जोड़ लगाकर मरीज को चलने-फिरने के लायक बनाया जाता है। लेकिन मेटल से एलर्जी होने पर भी एक मरीज की सर्जरी में विशेष प्रकार का जोड़ लगाकर फिर से उसे चलने में समर्थ बनाया तो मरीज की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। यह सफलता प्राप्त की नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल के डॉक्टर्स ने। हॉस्पिटल के ज्वाइंट रिपलेसमेंट सर्जन डॉ विजय शर्मा ने दोनों पैरों से चलने में लाचार एक महिला मरीज को विशेष तरह के ऑक्सीनिम ज्वाइंट से घुटनों का जोड़ प्रत्यारोपण करके मुश्किल सर्जरी सर्जरी को सफल बनाया।
मेटल से थी एलर्जी
नारायणा अस्पताल के प्रमुख जोड़ प्रत्यारोपण सर्जन डॉ. विजय शर्मा ने बताया कि 50 वर्षीय महिला इन्फ्लामेट्री आर्थराइटिस से पीडि़त थी और कुछ कदम चलने में भी लाचार थी। ऐसे में मरीज के दोनों घुटनों का प्रत्यारोपण करना आवश्यक हो गया था। लेकिन मरीज ने जब उन्हें बताया कि उसे गहने पहनने या किसी भी धातु के संपर्क में आने से एलर्जी हो जाती है। ऐसे में एलर्जी होने की बात को ध्यान में रखते हुए उन्हें प्रत्यारोपण में इस्तेमाल होने वाला साधारण मेटल का जोड़ लगाना संभव नहीं था तो एक विशेष प्रकार के ऑक्सीनिम ज्वाइंट लगा कर उनकी सर्जरी की गई। उनके दोनों घुटनों के जोड़ों का साथ ही प्रत्यारोपण किया गया।
8 प्रतिशत लोगों को दिक्कत
डॉ. विजय शर्मा ने बताया कि महिला की सर्जरी आसान नहीं थी। उन्हें मेटल एलर्जी थी। तीन से आठ प्रतिशत लोग ऐसी एलर्जी से पीडि़त होते हैं। मेटल जोड़ की जगह उन्हें ऑक्सीनिम जोड़ लगाया गया। जोड़ प्रत्यारोपण के बाद मरीज के ब्लड में रक्त आयोन का लेवल बढ़ जाता है। सर्जरी के बाद निकल की वजह से एलर्जी की समस्या भी सामान्य बात है। निकल एलर्जी से पीडि़त को कोबाल्ट से भी क्रॉस सेंसेटिविटी होती है। ऐसे में एलर्जी से पीडि़त मरीज का साधारण जोड़ प्रत्यारोपण नहीं किया जा सकता। इसीलिए उन्हें ऑक्सीनिम जोड़ लगाया जाता है जो 97.5 प्रतिशत जेरकॉनिम और 2.5 प्रतिशत नायोबियम से मिलकर बना होता है। इससे मरीज को एलर्जी का कोई खतरा नहीं रहता। सर्जरी में डॉ. मनीष गुप्ता और डॉ. लक्ष्मीकांत का सहयोग रहा।