
जयपुर . महिलाओं में पिछले कुछ सालों से हेल्थ के प्रति अवेयरनेस बढ़ गई हैं। योग , प्रणायाम, जुंबा, ऐरोबिक्स, कॉर्डियो, जिम, डाइट और डांस आदि के जरिए अपनी बॉडी की स्टेमिना बढ़ाकर वेट लॉस कर रही हैं। इस फील्ड में वीमन ट्रेनर का रूतबा भी बढ़ता जा रहा है। ट्रेनर्स पहले लोगों के लिए रॉल मॉडल बनती है और फिर दूसरे को ट्रेन्ड करती हैं। हमने उन महिलाओं से बात की जो इस फील्ड में काफी समय से कार्यरत हैं और जाना कैसे उनकी लाइफ स्टाईल और फूड हैबिट्स लोगों के लिए प्रेरणा का काम करती हैं।
आहार-दिनचर्या पर कसा नियन्त्रण
योग टीचर मिनाक्षी भट्ट पिछले 15 साल से योगा सीखा रही हैं। उन्होंने अब तक सैकड़ों महिलाओं को योगा सिखाया हैं। वे योगा सिखाने के साथ खुद भी नियमित रूप से एक घण्टा योगा और मॉर्निंग वॉक करती हैं। उन्हें हर तरह के आसन और सूर्य नमस्कार आते हैं। वेे बताती हैं कि हम जिस प्रोफेशन में होते हैं वहां लोग हमसे उम्मीद भी करते हैं कि हम स्वयं कितने स्वस्थ हैं। मैं नियमित रूप से 5 बजे उठती हूं। सुबह चार गिलास पानी पीना और नित्यक्रिया से निवृत होकर स्मृति वन वॉक करने जाती हूं। वहां का वातावरण बेहद शांतिप्रदायक और ऑक्सिजन से भरपूर होता हैं। एक घण्टा वॉक, मेडिटेशन और योगा करने के बाद घर आती हूं। गार्डन में ही एक गिलास एलोविरा और ज्वार का ज्यूस पीती हूं। घर आने के बाद यहां पर भी आधा गिलास में गोमूत्र मिलाकर सेवन करती हूं। गोमूत्र हमारी हजार बीमारियां दूर करता है। सुबह का नाश्ता 8 से 9 बजे तक कर लेती हूं। नाश्ते में हमेशा दलिया, अंकुरित दालें और ड्राईफ्रूट्स ही रहते हैं। दिन में दाल, रोटी और दही का सेवन हमेशा करती हूं जबकि रात का खाना 8 बजे से पहले कर लेती हूं। वे आगे बताती हैं कि योगा ही मेरा जीवन है। मेरी लाइफ में जब भी स्ट्रगल आया, योगा और मेडिटेशन ने बहुत मदद की। 40 साल की उम्र में मेरा वजन 55 किलो है।
6 से 7 घण्टे एरोबिक्स और कॉर्डियो
जस और एरोबिक्स ट्रेनर नीतू कंवर पिछले 10 साल से इस फील्ड में हैं। एरोबिक्स और कॉर्डियों एक्सरसाइज की मदद से वे अपना वेट 57 किलो से अधिक नहीं बढऩे देती। वे अब तक सैकड़ों महिलाओं को एरोबिक्स की ट्रेनिंग दे चुकी हैं। वे बताती हैं कि जिम में अधिकतर महिलाएं वेट लॉस के लिए ही आती हैं। हमारा यही मकसद होता है कि जिमिंग के साथ एरोबिक्स, कॉर्डियो और डाइट के साथ उनका वेट लॉस किया जा सके। जहां तक मेरी बात है कि महिलाओं को एक्सरसाइज कराने के कारण नियमित रूप से 6 से 7 घण्टे वर्कआउट मेरा रहता है। सुबह के नाश्ते मे पोहा और प्रोटीन डाइट लेना पसंद करती हूं। दिन में हैवी लंच लेकर छाछ पीती हूं और दो घण्टे की गहरी नींद लेती हूं। मुझे शाम को दोबारा जिम में जाना होता है इसलिए ज्यूस और फ्रूट साथ में रखती हूं। तला हुआ भोजन, मैदा और बेसन को एवोईड करती हूं। मेरा मानना है कि एरोबिक्स से कैलोरीज बर्न होती है और जमकर पसीना आता है। बॉडी में एनर्जी आती है और काम करने का स्टेमना बढ़ता है। हम जिस फील्ड में होते हैं उसका प्रंजेटेशन हमारी बॉडी से दिखता है, इसलिए दूसरों के मुकाबले हमें फिटनेस को लेकर अधिक सजग रहना पड़ता है।
Published on:
10 May 2018 03:42 pm
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