
जयपुर . फर्रूखाबाद घराने की अंतरराष्ट्रीय तबला वादक कोलकाता की रिम्पा शिवा जयपुर में प्रस्तुति देने आई इस दौरान उनसे हुई बातचीत में उन्होंने अपने जीवन के कई किस्सों के बारे में बताया। उन्होंने बतया की तीन साल की उम्र से ही उन्होंने तबले को आत्मसात करना शुरू कर दिया था और देखते ही देखते तबले के बड़े दिग्गजों की तारीफ मिलने लगी। तबले की गहन तकनीक और तालीम पिता और गुरु पंडित स्वप्न शिवा से ली है। वे कहती है की तबला मेरे लिए इबादत है और उस इबादत को वह रियाज रूपी आराधना से ही पूजती है। बात करते हुए कहा कि मैं देश-विदेशों में सैंकडों प्रस्तुतियां दे चुकी हूं, लेकिन जयपुर में प्रस्तुति देना यादगार साबित होता है। यहां की ऑडियंस भी सुरीली है और यहां क्लासिकल म्यूजिक के प्रति लोग की समझ भी बहुत अच्छी है। यहां से मिलने वाली प्रशंसा किसी से पुरस्कार से कम नहीं है।
रूढि़वादी परम्पराओं से नहीं आ पा रहे बाहर
रिम्पा ने कहा कि तबला आसान साज नहीं है और इस वाद्य पर प्रस्तुति देने वाली महिला कलाकारों की कमी भी है। मेरा अब तक का यह अनुभव कहता है कि रियाज के दम पर किसी भी वाद्य यंत्र को आत्मसात किया जा सकता है। मेरा मानना है कि जो याद करेगा, वही राज करेगा। उन्होंने कहा कि आज भी हमारा समाज रूढि़वादी परम्पराओं से बाहर नहीं निकल पाया है। संगीत के क्षेत्र में पैरेंट्स गल्र्स को नहीं जोड़ रहे है।
किसी भी वाद्य में भेदभाव नहीं हो
उन्होंने कहा कि आज वर्तमान परिदृश्य में लडक़ा-लडक़ी में किसी प्रकार का भेद नहीं समझा जाना चाहिए, उसी प्रकार हमें किसी भी विधा की तालीम देने में भी भेद नहीं समझना चाहिए। तबला, सारंगी, वायलिन, पखावज आदिवासी यंत्रों की तालीम भी लड़कियों को जरूर से दिलानी चाहिए। उन्होंने कहा कि मैं जहां भी स्कूल या कॉलेज में जाती हूं, तो वहां दो लड़कियों को संगीत सीखने के लिए जरूर से प्रोत्साहित करती हूं। वहां जब मंच पर मुझे जब कोई पैरेंट्स तबला बजाते हुए देखते हैं, तो वे भी अपनी लडक़ी को इस वाद्य की तालीम दिलाने के लिए मुझसे सम्पर्क करते है।
Published on:
10 May 2018 03:14 pm
बड़ी खबरें
View Allजयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
