
चेन्नई. मद्रास विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास एवं पुरातत्व विभाग की टीम ने रानीपेट ज़िले के अर्कोट ब्लॉक स्थित कथियावाड़ी गांव में सर्वेक्षण के दौरान क्वार्ट्ज पत्थर से बने औज़ारों का विशाल संग्रह खोजा है। यह खोज संकेत देती है कि यह क्षेत्र लगभग 3,00,000 से 10,000 वर्ष पूर्व आदिम मानवों का निवास स्थल रहा होगा। एसोसिएट प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष (प्रभारी) जे. सौंदरराजन के नेतृत्व में शोधार्थियों और विद्यार्थियों की टीम ने क्षेत्र का सर्वेक्षण संभावित उत्खनन स्थलों की पहचान के लिए किया था, लेकिन उनको पत्थर युग के औज़ारों का ऐसा संग्रह मिला जिसने इस स्थल को दक्षिण भारत के महत्वपूर्ण प्रागैतिहासिक स्थलों में शामिल कर दिया है। टीम को मध्य पुरापाषाण काल से लेकर सूक्ष्म औज़ार काल तक के उपकरण मिले हैं। इनमें कोर, स्क्रैपर, बुरिन, नॉच्ड टूल्स और बड़ी मात्रा में पत्थर के टुकड़े शामिल हैं, जो संकेत देते हैं कि यहां औज़ारों का निर्माण हुआ था।
सभी औज़ार स्थानीय रूप से उपलब्ध क्वार्ट्ज पत्थर से निर्मित
सूक्ष्म औज़ारों की बारीक कारीगरी समय के साथ तकनीकी विकास को दर्शाती है। विशेष बात यह है कि सभी औज़ार स्थानीय रूप से उपलब्ध क्वार्ट्ज पत्थर से बने हैं। इससे पहले उत्तर तमिलनाडु में मुख्यतः क्वार्ट्जाइट औज़ारों पर अध्ययन हुआ था। कथियावाड़ी की खोज बताती है कि यहां के प्रागैतिहासिक समुदायों ने क्वार्ट्ज का लंबे समय तक उपयोग किया और बदलते पर्यावरण के अनुसार तकनीक विकसित की। सौंदरराजन ने बताया यह स्थल आदिम मानवों के कच्चे माल चयन, प्रवास और पर्यावरणीय अनुकूलन को समझने में अहम जानकारी देगा। टीम अब विस्तृत उत्खनन की योजना बना रही है जिससे इस स्थल की आयु, बसावट और पत्थर युग की तकनीक पर और प्रमाण मिल सकें।