
राजस्थान की राजनीति में प्रतियोगी परीक्षाओं और पेपर लीक के मुद्दे को लेकर एक बार फिर भारी सियासी घमासान छिड़ गया है। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के उस दावे को पूरी तरह से नकार दिया है, जिसमें कहा गया था कि बीजेपी सरकार के पिछले पौने तीन साल के शासनकाल में राज्य में एक भी पेपर लीक नहीं हुआ है। अशोक गहलोत ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार निष्पक्ष जांच करवाने के बजाय सच पर पर्दा डालने का काम कर रही है।
गहलोत ने नीट-यूजी (NEET-UG), आरएएस (RAS), प्राध्यापक भर्ती और एलडीसी (LDC) जैसी प्रमुख परीक्षाओं में सामने आई कथित गड़बड़ियों और धांधलियों का ब्योरा देते हुए राज्य सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं और कहा है कि बीजेपी सरकार सच पर बुलडोजर चला रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के बयानों को तथ्यहीन करार देते हुए तीखा हमला बोला। गहलोत ने कहा कि मुख्यमंत्री का यह कहना कि उनके शासनकाल में एक भी पेपर लीक नहीं हुआ, पूरी तरह से गुमराह करने वाला बयान है।
उन्होंने लिखा कि मुख्यमंत्री को जनता के सामने यह स्वीकार करना चाहिए कि उन्होंने एक भी शिकायत की निष्पक्ष जांच नहीं होने दी ताकि सच कभी सामने न आ सके। पूर्व सीएम ने आरोप लगाया कि अगर राज्य में हुई परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो सरकार के 'एक भी लीक नहीं होने' के झूठे दावों के परखच्चे उड़ जाएंगे।
अपने बयान में अशोक गहलोत ने बीजेपी सरकार के कार्यकाल के दौरान हुई विभिन्न परीक्षाओं का जिक्र करते हुए सरकार को घेरा।
NEET-UG का एपिसेंटर: गहलोत ने कहा कि देश की सबसे बड़ी परीक्षा नीट-यूजी (NEET-UG) के पेपर लीक का एपिसेंटर राजस्थान बना और लाखों विद्यार्थियों को दोबारा परीक्षा देने का कष्ट झेलना पड़ा। सरकार ने शिकायतें छिपाईं और जब छात्रों ने एनटीए (NTA) को सीधे शिकायत दी तब जाकर सच सामने आया।
नवलगढ़ में खुले लिफाफे में RAS का पेपर: झुंझुनूं के नवलगढ़ सेंटर पर आरएएस का पेपर खुले लिफाफे में मिला, जबकि प्राध्यापक भर्ती का पेपर खुली सील के साथ परीक्षा केंद्र पर पहुंचा।
जैसलमेर एलडीसी भर्ती में धांधली: जैसलमेर के स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल सेंटर पर एलडीसी भर्ती में खिड़की के रास्ते पेपर बाहर भेजकर नकल कराने और मनपसंद वीक्षकों की ड्यूटी लगाने के गंभीर आरोप लगे।
जयपुर आरएसएसबी में ओएमआर शीट घोटाला: जयपुर स्थित आरएसएसबी (RSSB) का टेक्निकल हेड ओएमआर (OMR) शीट बदलते हुए पकड़ा गया, लेकिन उसने कितनी परीक्षाओं में बेईमानी की, इसका पता आज तक नहीं लगाया गया।
सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा को लेकर चल रहे विवाद और सड़क पर उतरे युवाओं पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर भी गहलोत ने सरकार को कटघरे में खड़ा किया। गहलोत ने कहा कि बीजेपी सरकार एसआई भर्ती रद्द करने का श्रेय जनता के बीच लेती रही, लेकिन हकीकत यह है कि भर्ती रद्द न हो, इसकी सिफारिश लेकर खुद सरकार ही राजस्थान हाईकोर्ट पहुंची थी।
उन्होंने कहा कि जब प्रदेश के बेरोजगार युवा अपने हक और न्याय का जवाब मांगने सड़कों पर उतरे, तो सरकार ने उन पर लाठियां बरसाईं और उनकी आवाज को दबाने का काम किया।
कांग्रेस सरकार की कठोर नीतियों और बीजेपी के पुराने शासनकाल की तुलना करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार के दौरान बनाए गए कड़े कानूनों का हवाला दिया। गहलोत ने दावा किया कि 2013 से 2018 के बीच बीजेपी सरकार में 12 पेपर लीक हुए, लेकिन माफिया को पोषित किया गया और कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
उन्होंने बताया कि कांग्रेस शासन में 400 से अधिक गिरफ्तारियां हुईं, माफिया की संपत्तियों पर बुलडोजर चलाया गया, आरपीएससी (RPSC) सदस्य को जेल भेजा गया, बोर्ड अध्यक्ष को बर्खास्त किया गया और 10 करोड़ रुपये के जुर्माने व आजीवन कारावास वाला देश का सबसे सख्त कानून बनाया गया।
गहलोत ने अपनी बात खत्म करते हुए कहा कि फर्क साफ है—हमने पेपर लीक माफिया की संपत्तियों पर बुलडोजर चलाया था और वर्तमान बीजेपी सरकार सच पर बुलडोजर चला रही है।