
पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि के अवसर पर देश भर के राजनीतिक गलियारों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। जहां नई दिल्ली स्थित 'सदैव अटल' स्मारक पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की, वहीं कांग्रेस पार्टी के भीतर राष्ट्रीय और राजस्थान प्रदेश स्तर पर दो अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आए। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सुबह-सुबह ही अपने-अपने सोशल मीडिया हैंडल्स के जरिए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हुए उन्हें नमन किया। दोनों वरिष्ठ नेताओं ने वाजपेयी जी को एक महान राजनेता, कुशल वक्ता और लोकतांत्रिक मूल्यों का संवाहक बताया, जिसकी चर्चा अब सियासी गलियारों में जोरों पर है।
दूसरी ओर, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के आधिकारिक डिजिटल मंचों के साथ-साथ मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी सहित पार्टी के शीर्ष राष्ट्रीय नेताओं के सोशल मीडिया खातों पर वाजपेयी जी की पुण्यतिथि से संबंधित कोई संदेश पोस्ट नहीं किया गया। राष्ट्रीय स्तर पर खामोशी और राजस्थान कांग्रेस के शीर्ष नेताओं द्वारा सोशल मीडिया पर दी गई श्रद्धांजलि ने राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान आकर्षित किया है।
16 अगस्त 2026 को राजस्थान कांग्रेस के दोनों प्रमुख नेताओं ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी-अपनी श्रद्धांजलि पोस्ट शेयर की।
अशोक गहलोत का संदेश:
गोविंद सिंह डोटासरा का संदेश
डोटासरा ने वाजपेयी के शासनकाल की सराहना करते हुए उनके योगदान को देश के विकास और उन्नति में महत्वपूर्ण और अतुलनीय बताया। इधर, राजस्थान कांग्रेस के तीसरे वरिष्ठ नेता एवं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जुली ने वाजपेयी की पुण्यतिथि के संबंध में कोई प्रतिक्रिया नहीं जारी की है।
चर्चा इसलिए भी बढ़ गई क्योंकि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के आधिकारिक सोशल मीडिया खातों से देश के कई अन्य पूर्व मुख्यमंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं की जयंती तथा पुण्यतिथि पर स्मरण संदेश जारी किए गए।
टी. अंजैया: आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत टी. अंजैया की जयंती पर पार्टी की ओर से नमन किया गया।
कोतला विजया भास्कर रेड्डी: आंध्र प्रदेश के ही पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत कोतला विजया भास्कर रेड्डी की जयंती पर श्रद्धांजलि दी गई।
साल्सेंग सी. मारक: मेघालय के पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत साल्सेंग सी. मारक की पुण्यतिथि पर भी आधिकारिक पोस्ट साझा की गई।
इसके बावजूद, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि से जुड़ा कोई संदेश एआईसीसी या राजस्थान पीसीसी के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर दिखाई नहीं दिया।
राजस्थान की राजनीति पर पैनी नजर रखने वाले जानकारों का मानना है कि अटल बिहारी वाजपेयी जी की छवि हमेशा से एक सर्वस्वीकार्य जननेता की रही है। उनकी कार्यशैली और दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सभी पक्षों को साथ लेकर चलने के स्वभाव के कारण विपक्षी दलों के कई नेता व्यक्तिगत रूप से उनका सम्मान करते रहे हैं।
राजस्थान की राजनीति में विचारधारा की भिन्नता के बावजूद व्यक्तिगत सम्मान और राजनीतिक शिष्टाचार की पुरानी परंपरा रही है। गहलोत और डोटासरा द्वारा अटल जी को श्रद्धांजलि देना इसी स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपरा का हिस्सा माना जा रहा है।
राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी संगठन अपने केंद्रीय प्रोटोकॉल और वैचारिक प्राथमिकताओं के अनुसार डिजिटल गतिविधियों को संचालित करता है, जबकि राज्यों के वरिष्ठ नेता स्थानीय जनभावनाओं और अपनी व्यक्तिगत शैली के अनुरूप प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं।
राजस्थान कांग्रेस नेतृत्व के इस कदम को जहां पार्टी के कार्यकर्ता एक समावेशी और परिपक्व राजनीतिक आचरण के रूप में देख रहे हैं, वहीं बीजेपी समर्थकों और राजनीतिक प्रेक्षकों के बीच भी यह पोस्ट चर्चा का विषय बनी रही।