
राजस्थान विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव बहाल करने और राजस्थानी भाषा विभाग की स्थापना की मांग को लेकर पिछले 15 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे छात्र नेता शुभम रेवाड़ के आंदोलन में बुधवार को बड़ा राजनीतिक मोड़ आया। जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल के ICU में गंभीर हालत में भर्ती छात्र नेता की सुध लेने राज्य सरकार का कोई नुमाइंदा तो नहीं पहुंचा, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत खुद अस्पताल पहुंचे।
गहलोत ने अस्पताल के आईसीयू में जाकर जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे शुभम रेवाड़ का हाल-चाल जाना और उनके स्वास्थ्य पर गहरी चिंता व्यक्त की। पिछले 48 घंटों से अन्न-जल और मेडिकल ट्रीटमेंट पूरी तरह त्याग चुके छात्र नेता ने पूर्व सीएम अशोक गहलोत के आग्रह और मान-मनोवल के बाद पानी पीने पर सहमति जताई, जिसके बाद गहलोत ने खुद अपने हाथों से शुभम को पानी पिलाया।
राजस्थान विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार से शुरू हुआ यह आंदोलन अब राजधानी जयपुर का सबसे संवेदनशील, राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बन चुका है। अनशन के 15वें दिन जब शुभम रेवाड़ की स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई थी, तब पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, आदर्श नगर विधायक रफीक खान के साथ अचानक एसएमएस अस्पताल पहुंचे।
अस्पताल के आईसीयू वार्ड में दाखिल होकर गहलोत ने सबसे पहले डॉक्टरों से शुभम रेवाड़ के वाइटल्स और हेल्थ पैरामीटर्स की जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने अनशनकारी छात्र नेता से बातचीत की और कहा कि मांगें अपनी जगह हैं, लेकिन छात्रशक्ति का जीवन सबसे ज्यादा कीमती है।
गहलोत के काफी समझाने और आग्रह करने के बाद शुभम ने पिछले 48 घंटे से जारी जल त्याग का कठोर निर्णय वापस लिया। इसके बाद गहलोत ने खुद ग्लास से शुभम रेवाड़ को पानी पिलाकर उनका जल अनशन समाप्त कराया, हालांकि छात्र नेता का अन्न त्याग और मांगों को लेकर सत्याग्रह अभी भी जारी है।
अस्पताल पहुंचने से पहले ही पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने ऑफिशियल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए भजनलाल शर्मा सरकार के रवैये पर तीखे सवाल खड़े किए थे।
अशोक गहलोत ने लिखा, "छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर छात्र नेता श्री शुभम रेवाड़ का एसएमएस अस्पताल में 15 दिन से अनशन जारी है और अब तो उन्होंने पानी पीना भी छोड़ दिया है। भाजपा सरकार ने न उनका अनशन समाप्त करवाने की कोशिश की, न उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया।"
उन्होंने आगे लिखा कि राजस्थान के लाखों छात्र-छात्राएं लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत छात्रसंघ चुनाव की मांग कर रहे हैं, लेकिन राज्य सरकार बिना किसी ठोस वजह के हठधर्मिता पर अड़ी हुई है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के हालिया अदालती फैसलों का हवाला देते हुए राजस्थान सरकार की नीयत पर सवाल उठाए। गहलोत ने कहा कि मध्य प्रदेश में हाई कोर्ट के आदेश के बाद सितंबर 2026 तक राज्य के सभी 15 सरकारी विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव आयोजित कराए जाने की तैयारी है।
गहलोत ने कहा, "आखिर राजस्थान की भाजपा सरकार को छात्र राजनीति और युवाओं से क्या डर है? जब पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश में सितंबर 2026 तक सभी विश्वविद्यालयों में चुनाव कराने का रास्ता साफ हो चुका है, तो राजस्थान सरकार वहां से सीख क्यों नहीं लेती? सरकार को तुरंत छात्रसंघ चुनाव कराने की आधिकारिक घोषणा करनी चाहिए।"
राजस्थान विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार से शुरू हुआ यह छात्र आंदोलन अब प्रशासन और सरकार के लिए गले की फांस बनता जा रहा है
23 जुलाई 2026: छात्र नेता शुभम रेवाड़ ने राजस्थान यूनिवर्सिटी के मुख्य द्वार पर छात्रसंघ चुनाव बहाली और राजस्थानी भाषा विभाग बनाने की मांग पर अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू किया।
31 जुलाई 2026 (9वां दिन): अनशन स्थल पर स्वास्थ्य बिगड़ने और सांस लेने में तकलीफ के बाद पुलिस-प्रशासन ने शुभम को जबरन एसएमएस अस्पताल में भर्ती कराया।
3 अगस्त 2026 (12वां दिन): सरकार की तरफ से किसी प्रतिनिधि के न आने से नाराज होकर शुभम ने ड्रिप, दवाइयां और पानी पीना (जल त्याग) बंद कर दिया।
5 अगस्त 2026 (15वां दिन): पूर्व सीएम अशोक गहलोत और विधायक रफीक खान SMS अस्पताल पहुंचे। गहलोत के हाथ से पानी पीकर शुभम ने 48 घंटे बाद जल ग्रहण किया।
15 दिन बीत जाने के बावजूद सरकार के किसी भी मंत्री या प्रशासनिक वार्ताकार के अस्पताल न पहुंचने पर छात्र समुदाय और विपक्ष में भारी रोष है। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि युवाओं की जायज मांगों पर शीघ्र फैसला नहीं लिया गया और छात्र नेता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हुआ, तो पूरे प्रदेश के कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज में उग्र आंदोलन खड़ा किया जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी नगर निगम और पंचायती राज चुनावों से ठीक पहले छात्र राजनीति का यह मुद्दा सत्तारूढ़ भाजपा के लिए ग्रामीण और शहरी युवाओं के बीच मुश्किल खड़ी कर सकता है।