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राजस्थान पुलिस की चेतावनी: इनाम के लालच में फंस गए तो खो सकते हैं सब कुछ, अनजान लिंक या कॉल पर तुरंत भरोसा नहीं करें

“आपने ₹5 लाख जीते हैं” जैसे मैसेज, लिंक या कॉल पर तुरंत विश्वास न करें। इनाम का लालच ठगी का जाल हो सकता है। पुलिस का मंत्र है – रुकें, जांचें, फिर क्लिक करें।
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जयपुर

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MOHIT SHARMA

Sep 24, 2026

AI generated image of Cyber Awareness

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राजस्थान पुलिस ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण साइबर सुरक्षा संदेश जारी किया है। आधिकारिक हैंडल पर पोस्ट में साफ चेतावनी दी गई है – “आपने₹5 लाख जीते हैं” जैसे मैसेज, लिंक या कॉल पर तुरंत विश्वास न करें। इनाम का लालच ठगी का जाल हो सकता है। पुलिस का मंत्र है – रुकें, जांचें, फिर क्लिक करें। अनजान लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी सत्यता जरूर जांच लें। यह संदेश सिर्फ औपचारिकता नहीं है।

जयपुर-अलवर-भरतपुर-दौसा कॉरिडोर ज्यादा प्रभावित

राजस्थान में साइबर ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। 2026 के पहले सात महीनों में ही राज्य में साइबर धोखाधड़ी से लगभग ₹387 करोड़ का नुकसान दर्ज हुआ। निवेश घोटाले, फर्जी नौकरी, डिजिटल अरेस्ट और इनाम-लॉटरी के जाल आम हो गए हैं। जयपुर-अलवर-भरतपुर-दौसा कॉरिडोर जैसे इलाके खासकर प्रभावित हैं।

इनाम का संदेश कैसे फंसाता है लोगों को?

ठग आमतौर पर एसएमएस, व्हाट्सएप या कॉल के जरिए संदेश भेजते हैं - “बधाई हो! आपने ₹5 लाख या गाड़ी जीत ली है। लिंक पर क्लिक करें या नंबर पर कॉल करें।” लिंक खोलते ही फर्जी वेबसाइट खुलती है। वहां टैक्स, प्रोसेसिंग फीस, जीएसटी या ट्रांसपोर्ट चार्ज के नाम पर पैसे मांगे जाते हैं। कुछ मामलों में कूरियर से स्क्रैच कूपन भी भेजा जाता है, जिसमें 10-15 लाख रुपए या कार का इनाम दिखाया जाता है। पीड़ित लालच में पैसे ट्रांसफर कर देते हैं और फिर ठग गायब हो जाते हैं।

राजस्थान में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं

राजस्थान में इनाम और लॉटरी के लालच वाले साइबर ठगी के कई मामले दर्ज हुए हैं। 2025 में पुलिस ने कूरियर और स्क्रैच कूपन के जरिए लॉटरी घोटाले को लेकर विशेष अलर्ट जारी किया था। ठग नामी कंपनियों का प्रतिनिधि बनकर कॉल करते थे और कूपन स्क्रैच करने पर बड़ी रकम या गाड़ी का इनाम बताते थे। फिर रजिस्ट्रेशन, टैक्स और अन्य शुल्क के नाम पर पैसे ठग लेते थे।

पुराने नोट-सिक्कों के बदले लाखों का इनाम वाला गिरोह भी सक्रिय

पुराने नोट-सिक्कों के बदले लाखों का इनाम देने वाले गिरोह भी सक्रिय रहे। हाल ही में (सितंबर 2026) जयपुर पुलिस ने ऐसे एक अंतरराज्यीय गिरोह के 8 सदस्यों (दो महिलाओं सहित) को गिरफ्तार किया। वे फेसबुक पर रील्स डालकर लोगों को फंसाते थे। साइबर ठगी के अन्य बड़े मामलों में ‘बॉसस्कैम’(₹6.80 करोड़), शेयर ट्रेडिंग घोटाला (₹500 करोड़ तक का नेटवर्क) और फर्जी कॉल सेंटर भी शामिल हैं। राज्य में सालाना लगभग 25,000 नए साइबर मामले बढ़ रहे हैं।

कैसे बचें इस जाल से?

  • अनजान नंबर या लिंक से आए किसी भी इनाम संदेश पर तुरंत प्रतिक्रिया न दें।
  • कभी भी व्यक्तिगत जानकारी, ओटीपी या बैंक डिटेल्स शेयर न करें।
  • संदिग्ध लिंक खोलने से पहले आधिकारिक वेबसाइट या ऐप से जांच करें।
  • अगर ठगी हो जाए तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें। व्हाट्सएप पर 9256001930 या 9257510100 भी उपलब्ध हैं।
  • गोल्डन ऑवर में शिकायत करने से पैसे फ्रीज होने की संभावना बढ़ जाती है।
  • राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

राजस्थान पुलिस की सलाह – जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा

राजस्थान पुलिस लगातार जागरूकता अभियान चला रही है। बिलबोर्ड, सोशल मीडिया और हेल्पलाइन के जरिए लोगों को सतर्क किया जा रहा है। ‘साइबरशील्ड’ जैसे अभियानों में फर्जी कॉल सेंटर और गिरोह पकड़े गए हैं। पैसे की रिकवरी में भी सुधार हुआ है, लेकिन सबसे बेहतर तरीका है कि लालच में न फंसें। याद रखें - असली इनाम कभी अनजान मैसेज या कॉल से नहीं आता। रुकें, जांचें और सुरक्षित रहें। किसी भी संदेह में 1930 डायल करें। साइबर ठगी से खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रखें।