पश्चिम बंगाल में भाजपा की ऐतिहासिक जीत के बाद सुवेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, लेकिन इस नई कैबिनेट में सबसे ज्यादा चर्चा राजस्थान मूल के अशोक कीर्तनिया की है।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार, 9 मई के दिन एक नया इतिहास लिखा गया है। कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित एक भव्य समारोह में भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। राज्यपाल आर. एन. रवि ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। लेकिन इस पूरे समारोह में राजस्थान के लोगों की नजरें एक खास चेहरे पर टिकी थीं। वो चेहरा है अशोक कीर्तनिया का, जिन्हें सुवेंदु सरकार में महत्वपूर्ण 'कैबिनेट मंत्री' की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
अशोक कीर्तनिया भले ही आज बंगाल की राजनीति का जाना-पहचाना चेहरा हैं, लेकिन उनकी जड़ें राजस्थान की वीर प्रसूता माटी से जुड़ी हैं।
अशोक कीर्तनिया की राजनीतिक यात्रा उनकी कड़ी मेहनत और जमीनी पकड़ का नतीजा है।
लगातार दूसरी जीत: उन्होंने पहली बार 2021 में बनगांव उत्तर (SC) सीट से जीत दर्ज की थी। 2026 के इस ऐतिहासिक चुनाव में उन्होंने न केवल अपनी सीट बचाई, बल्कि 40,670 वोटों के भारी अंतर से जीत हासिल कर अपनी लोकप्रियता साबित कर दी।
मतुआ समुदाय के 'मसीहा': अशोक कीर्तनिया बंगाल के प्रभावशाली दलित नेताओं में शुमार हैं। सीमावर्ती इलाकों और विशेष रूप से मतुआ समुदाय के बीच उनकी जबरदस्त पैठ है। भाजपा की इस बड़ी जीत में मतुआ वोट बैंक को एकजुट करने में उनका सबसे बड़ा हाथ माना जाता है।
लगभग 52 वर्षीय अशोक कीर्तनिया एक सधे हुए राजनेता होने के साथ-साथ एक सफल व्यवसायी भी हैं।
पश्चिम बंगाल चुनाव में भाजपा ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत 9 ऐसे उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था जिनका संबंध राजस्थान से था। इन 9 में से 5 उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की, जो यह दर्शाता है कि प्रवासी राजस्थानी समुदाय अब बंगाल की राजनीति में 'किंगमेकर' की भूमिका में आ गया है।
1- विजय ओझा, जोड़ासांको - 5797
2- भरत कुमार झंवर, बेलडांगा - 13208
3- अजय कुमार पोद्दार, कुल्टी - 26498
4- राजेश कुमार, जगद्दल - 20909
5- अशोक कीर्तनिया, बनगांव उत्तर - 40670।