अटल, आडवाणी व भैरों सिंह शेखावत की पहली फोटो दिसंबर 1956 की है तब राजस्थान जनसंघ का पहला अधिवेशन कोटा में हुआ था और दूसरी फोटो साल 2004 की अटलजी के जन्मदिन की है।
जयपुर। राजनीति में वैसे तो सत्ता हासिल करने के लिए साजिश की कई मिसालें सामने आई हैं लेकिन इन सबके बीच दोस्ती की भी कुछ यादगार मिसालें हैं। इनमें अटल जी और भैरोंसिंह शेखावत की दोस्ती का एक अलग स्थान है।
दोनों ने ही भारतीय राजनीति में अहम जगह बनाई। एक देश के प्रधानमंत्री बने तो दूसरे उपराष्ट्रपति। अटल, आडवाणी और भैरोसिंह की दोस्ती राजस्थान से शुरू हुई। राजनीति के साथ इनकी आपसी समझ में इजाफा होता गया और भावनात्क रूप से करीब आए।
शेखावत की पुत्री का किया था कन्यादान
अटल बिहारी वाजपेयी का जयपुर से शुरू से गहरा नाता रहा। पूर्व उपराष्ट्रपति भैरोंसिंह शेखावत उनके अभिन्न मित्र थे। अटल, आडवाणी और शेखावत की मित्रता को सदैव याद किया जाता है।
जयपुर की सरजमीं पर जनसंघ और भाजपा के तीन क्षत्रपों अटल, लालकृष्ण आडवाणी और शेखावत के बीच रिश्तों की नवीन इबारत लिखी गई थी। इनके बीच सियासत से परे दोस्ती का अध्याय राजस्थान से ही शुरू हुआ था। वाजपेयी का राजस्थान से सियासी ही नहीं, भावनात्मक रिश्ता भी था।
वह शेखावत की पुत्री की शादी में कन्यादान करने जयपुर आए थे। सन् 1982 में 3 फरवरी को यह वैवाहिक समारोह उसी जगह था, जहां आज राजस्थान भाजपा का प्रदेश मुख्यालय है। इस विवाह में वाजपेयी और आडवाणी विशेष तौर पर आए थे। तब वाजपेयी 2 दिन जयपुर रुके थे।
शेखावत का प्रचार करने 1977 में छीपाबड़ौद आए थे वाजपेयी
वाजपेयी 1977 में भैरोसिंह शेखावत का चुनाव प्रचार करने छीपाबड़ौद आए थे। छबड़ा विधायक प्रतापसिंह सिंघवी ने बताया कि 1977 में शेखावत पहली बार मुख्यमंत्री लेकिन वह विधायक नहीं थे।
उनके लिए मेरे पिता प्रेमसिंह सिंघवी ने छबड़ा सीट से त्याग पत्र दिया था। शेखावत ने इस सीट पर उपचुनाव लड़ा तो वाजपेयी प्रचार करने आए। तब वह मोरारजी देसाई की सरकार में विदेश मंत्री थे। छीपाबड़ौद में उन्होंने आम सभा को संबोधित और कस्बे में रोड-शो किया था। इस चुनाव में शेखावत की जीत हुई थी।