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जयपुर। श्याम नगर विकास समिति के कार्यकारिणी चुनाव (2026-28) को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता, पारदर्शिता और नियमों के पालन को लेकर स्थानीय निवासियों और उम्मीदवारों ने गंभीर सवाल उठाए हैं।
आरोप है कि लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी करते हुए चुनाव संचालन में पक्षपातपूर्ण निर्णय लिए गए, जिससे कई इच्छुक उम्मीदवारों, खासकर महिलाओं की भागीदारी प्रभावित हुई है। मामले में एडवोकेट उमा सिंघवी ने निर्वाचन अधिकारी सेवानिवृत आइएएस एस.के .जय को उनकी ओर से की गई गलतियों से अवगत कराया है।
शिकायती पत्र के मुताबिक वर्तमान अध्यक्ष प्रदीप गुगलिया पिछले करीब आठ वर्षों से पद पर हैं और उन पर निर्णय प्रक्रिया में एकतरफा रवैया अपनाने के आरोप लगे हैं। वहीं, चुनाव अधिकारी एस के विजय की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में है। कुछ सदस्यों का कहना है कि चुनाव से ठीक पहले सांस्कृतिक कार्यक्रमों और अन्य गतिविधियों की घोषणा की गई, जिसे आचार संहिता के उल्लंघन के रूप में देखा गया। हालांकि, बाद में विरोध के चलते इन्हें निरस्त कर दिया गया।
नामांकन प्रक्रिया को लेकर भी असंतोष सामने आया है। कई उम्मीदवारों के फार्म छोटी-छोटी त्रुटियों के आधार पर निरस्त कर दिए गए और उन्हें सुधार का अवसर नहीं दिया गया। वहीं, आरोप यह भी है कि कुछ मामलों में नियमों का समान रूप से पालन नहीं हुआ। वहीं एक ही व्यक्ति के दो पदों के लिए नामांकन स्वीकार किए जाने का मामला चर्चा में है, जबकि दिशा-निर्देशों में इसे स्पष्ट रूप से वर्जित बताया गया था।
चुनाव अधिकारी की आयु और कार्यक्षमता को लेकर भी सवाल उठे हैं। कुछ सदस्यों ने दावा किया कि संवाद और सुनवाई में कठिनाई के कारण प्रक्रिया प्रभावित हुई। मामले में महिला सदस्यों ने विशेष रूप से अपनी नाराजगी जताते हुए कहा कि वे समिति के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाना चाहती थीं, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों ने उनके प्रयासों को सीमित कर दिया। उनका कहना है कि देशभर में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी के बीच स्थानीय स्तर पर इस तरह की बाधाएं निराशाजनक हैं।
Updated on:
09 Apr 2026 09:39 pm
Published on:
09 Apr 2026 09:38 pm
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