पुलिस अधीक्षक बाड़मेर के पास एक संदिग्ध (संभवत: पाकिस्तान इंटेलिजेंस ऑपरेटिव ) कॉल आया। कॉल करने शख्स ने स्वयं को 1961 बैच का आईपीएस अधिकारी बताया और एयर फोर्स स्टेशन उत्तरलाई के विंग कमाण्डर से बात करवाने को कहा। गुरुवार शाम इस शख्स ने सबसे पहले बाड़मेर एस पी परिस देशमुख के निजी सहायक गोपाराम विश्नोई के मोबाइल पर फोन किया और आदेशात्मक भाषा में उनसे बात की। पी ए से विंग कमाण्डर के नम्बर मांगे गए। लेकिन पी ए ने कोई जानकारी नहीं दी।
पुलिस अधीक्षक बाड़मेर के पास एक संदिग्ध (संभवत: पाकिस्तान इंटेलिजेंस ऑपरेटिव ) कॉल आया। कॉल करने शख्स ने स्वयं को 1961 बैच का आईपीएस अधिकारी बताया और एयर फोर्स स्टेशन उत्तरलाई के विंग कमाण्डर से बात करवाने को कहा। गुरुवार शाम इस शख्स ने सबसे पहले बाड़मेर एस पी परिस देशमुख के निजी सहायक गोपाराम विश्नोई के मोबाइल पर फोन किया और आदेशात्मक भाषा में उनसे बात की। पी ए से विंग कमाण्डर के नम्बर मांगे गए। लेकिन पी ए ने कोई जानकारी नहीं दी। फिर इस संदिग्ध शख्स ने एस पी से बात करने की हिम्मत की। एस पी देशमुख को बातचीत में अहसास हुआ कि कोई फर्जी कॉल है। फिर एस पी ने चतुराई से उसकी पूरी बात सुनी। उसने एस पी को आदेशात्मक लहजे में कहा कि वह विंग कमाण्डर को बात करने के लिए कहे। एस पी ने ओ के बोलकर बात खत्म की। पांच मिनट बाद इस शख्स ने एस पी के व्हाट्सएप पर कुछ फोटो भेजे, जिसके जरिए यह सिद्ध करने का प्रयास किया कि वह आईपीएस व जम्मू एण्ड कश्मीर का पूर्व डीजीपी है। उसने स्वयं के मोदी व राजस्थान डीजीपी का परिचित होने की शेखी भी बघारी। गुरुवार शाम हुए इस घटनाक्रम को एस पी परिस देशमुख ने शुक्रवार को सार्वजनिक किया और चेताया कि सीमावर्ती जिले बाड़मेर में एेसे कॉल आ रहे हैं, जिनसे सतर्क रहने की जरुरत है। किसी अपरिचित को कोई जानकारी नहीं दें। उन्होंने अंदेशा जताया कि यह कॉल पाक इण्टेलिजेंस ऑपरेटिव का हिस्सा हो सकता है। एस पी के पास आए कॉल की एजेन्सियां जांच कर रही है।