Heatwave : गर्मी में बरतें ये सावधानियां, नहीं तो सेहत को होगा बड़ा नुकसान। एसएमएस अस्पताल में बढ़ी मरीजों की संख्या, क्या आप भी खतरे में हैं?
जयपुर. तापमान में लगातार हो रही वृद्धि अब लोगों के स्वास्थ्य पर भारी पड़ने लगी है। मार्च के महीने में ही भीषण गर्मी के कारण डी-हाइड्रेशन (निर्जलीकरण) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। आमतौर पर यह समस्या अप्रैल और मई में अधिक देखी जाती थी, लेकिन इस बार मार्च में ही अस्पतालों में डी-हाइड्रेशन से ग्रसित मरीजों की संख्या बढ़ गई है।
एसएमएस अस्पताल और सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक की ओपीडी में मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई है। डॉक्टरों के अनुसार, ओपीडी में आने वाले मरीजों में से 20 फीसदी तक लोग डी-हाइड्रेशन से पीड़ित हैं। इन मरीजों को अत्यधिक प्यास लगना, मुंह सूखना, ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव, पेशाब कम आना, सिरदर्द, कमजोरी और चक्कर आने जैसी समस्याएं हो रही हैं। कुछ मरीजों में डायरिया, बुखार, एलर्जी और संक्रामक रोगों के लक्षण भी पाए जा रहे हैं।
एसएमएस सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक अस्पताल के अधीक्षक डॉ. विनय मल्होत्रा के अनुसार, किडनी और ब्लड शुगर से ग्रसित मरीज डी-हाइड्रेशन के कारण अधिक परेशानी झेल रहे हैं। इन बीमारियों से पीड़ित मरीजों का शरीर सामान्य लोगों की तुलना में अधिक संवेदनशील होता है, जिससे पानी की कमी होने पर उनकी स्थिति जल्दी बिगड़ सकती है। खासतौर पर 50 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों को इस समय विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
चिकित्सकों के अनुसार, अधिकांश लोग पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पीते, जिससे शरीर में पानी की कमी हो जाती है। शरीर के डी-हाइड्रेशन के संकेतों को समय रहते नहीं पहचानने के कारण लोग अपनी दिनचर्या में कोई बदलाव नहीं करते और स्थिति गंभीर होने पर ही अस्पताल पहुंचते हैं। कुछ लोग चक्कर खाकर गिर भी रहे हैं, जिससे सिर में चोट लगने जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी में डी-हाइड्रेशन से बचने के लिए जरूरी है कि लोग पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं और खानपान में बदलाव करें।
चिकित्सकों का कहना है कि गर्मी में लापरवाही बरतने से डी-हाइड्रेशन की समस्या गंभीर रूप ले सकती है। ऐसे में लक्षणों को पहचानकर तुरंत उचित उपाय करना जरूरी है। थोड़ी सतर्कता और सही खानपान से गर्मी के दुष्प्रभाव से बचा जा सकता है।