
भैराणा/बिचून। भैराणा धाम में चल रहे आंदोलन के शांतिपूर्ण समाधान के लिए राज्य सरकार की ओर से गठित मंत्रिमंडलीय उपसमिति ने संतों से वार्ता की। भैराणा धाम में करीब एक घंटे तक बंद कमरे में वार्ता हुई। संत समाज की सात मांगों में से पांच मांगों पर सरकार ने सहमति जता दी है, लेकिन अभी दो मांगों पर सहमति नहीं बन पाई। मंत्रिमंडलीय उपसमिति अब मुख्यमंत्री के साथ अन्य दो मांगों पर विचार-विमर्श करेगी। इसके बाद समिति फिर से संतों से वार्ता करेगी।
मंत्रिमंडलीय उपसमिति में शामिल गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने बताया कि भैराणा धाम संघर्ष समिति के संतों के साथ सकारात्मक माहौल में वार्ता की गई है। संत समाज ने भी स्वीकार किया है कि हम विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन आस्था के केंद्रों का संरक्षण हो। संतों से आग्रह किया है कि एक ऐसा प्रस्ताव बनाकर दें जिससे विकास भी अवरुद्ध न हो और धाम का संरक्षण हो सके। संतों ने विश्वास दिलाया कि चर्चा करने के बाद प्रस्ताव तैयार करेंगे।
इससे पहले उपसमिति में शामिल मंत्री बेढम, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री कन्हैया लाल चौधरी और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा ने दादू वाणी मंदिर में दर्शन किए और वहां साधु-संतों का आशीर्वाद लिया। वार्ता में संघर्ष समिति की ओर से अध्यक्ष महंत गोवर्धन दास महाराज, संत रामरतन दास, हरिओम दास, हरिनारायण दास, चेतन दास, मधुसूदन दास और देवादास सहित कई प्रमुख संत और पदाधिकारी शामिल हुए।
संत समाज ने बताया कि वार्ता में पांच मांगों पर सहमति बन चुकी है, लेकिन बिचून रीको निरस्त करने व औद्योगिक क्षेत्र को दूसरी जगह स्थानांतरित करने की मांग पर कोई निर्णय नहीं हो सका है।
मंत्रियों ने प्रस्तावित रीको भूमि का भी अवलोकन किया। साथ ही बारिश के दिनों में पहाड़ी से निकलने वाले नालों के बारे में जानकारी ली। इसके बाद धरना स्थल पर पहुंचे मंत्रियों ने संतों से धरना समाप्त करने का आग्रह किया, लेकिन संतों ने विवाद का निस्तारण नहीं होने तक धरना देने की बात कही। उधर, जयपुर आते समय बिचून के लोगों ने रीको स्थापित करने व रोजगार की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा।
इधर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने भाजपा प्रदेशाध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद मदन राठौड़ को कानूनी नोटिस भेजा है। इसमें राठौड़ पर मानहानिकारक, भड़काऊ और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रतिकूल बयान देने के आरोप लगाए गए हैं। नोटिस में मदन राठौड़ से सार्वजनिक रूप से बयान वापस लेने, बिना शर्त माफी मांगने तथा निर्धारित अवधि में जवाब देने के लिए कहा गया है।