
Rajasthan Panchayat Municipal Election Update
राजस्थान हाई कोर्ट की ओर से राज्य में पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव को 31 जुलाई 2026 तक पूरा कराने की सख्त समय सीमा तय की जा चुकी है। अदालत के इस ऐतिहासिक फैसले के बाद उम्मीद की जा रही थी कि प्रदेश में चुनावी बिगुल बेहद जल्द फूंक दिया जाएगा। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि आदेश के 12 दिन बाद भी प्रशासनिक मशीनरी की रफ्तार काफी धीमी दिखाई दे रही है। बड़ी बात ये है कि राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से जिला निर्वाचन अधिकारियों के लिए अभी तक कोई भी नया आधिकारिक परिपत्र या मार्गदर्शिका जारी नहीं की गई है। इस प्रशासनिक शिथिलता के साथ-साथ अन्य तकनीकी और कानूनी अड़चनें भी सामने आ रही हैं, जिसके चलते तय समय पर चुनाव संपन्न कराने की राह में लगातार सस्पेंस गहराता जा रहा है।
राजस्थान उच्च न्यायालय ने स्थानीय लोकतंत्र की आवश्यकता को सर्वोपरि मानते हुए राज्य सरकार और चुनाव कराने वाली नोडल एजेंसी को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि जुलाई के अंत तक सभी चुनावी प्रक्रियाओं को सुचारू रूप से पूर्ण कर लिया जाए। न्यायालय के इस निर्देश को जारी हुए करीब 12 दिन का लंबा समय बीत चुका है, लेकिन राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से अब तक इस संबंध में जिला स्तर के अधिकारियों को कोई नए क्रियान्वयन आदेश नहीं भेजे गए हैं।
आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर यह तथ्य सामने आता है कि स्थानीय चुनावों को लेकर अंतिम महत्वपूर्ण परिपत्र 24 मार्च 2026 को जारी किया गया था। यह परिपत्र मुख्य रूप से नगरीय निकायों की निर्वाचक नामावलियों (Voter Lists) के पुनरीक्षण कार्य और अपडेशन को लेकर सार्वजनिक किया गया था। 24 मार्च के बाद से लेकर अब तक चुनाव संबंधी कोई भी नया बड़ा नीतिगत या सांगठनिक आदेश आयोग द्वारा सार्वजनिक नहीं किया गया है, जिसने राज्य की चुनावी तैयारियों को शुरुआती स्तर पर ही रोक रखा है।
राजस्थान में पंचायत-निकाय चुनाव की घोषणा और वार्डों के पुनर्गठन की राह में जो सबसे बड़ा तकनीकी रोड़ा इस समय सामने आ रहा है, वह है राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग की आरक्षण निर्धारण से जुड़ी अंतिम रिपोर्ट का लंबित होना। नियमों के मुताबिक, सीटों के आरक्षण का सही और नया खाका तैयार किए बिना चुनाव की तारीखों का ऐलान संभव नहीं है।
वर्तमान में राज्य ओबीसी आयोग आरक्षण निर्धारण की इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से पूरा करने की दिशा में दिन-रात काम कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक, अभी भी राजस्थान की 400 से अधिक ऐसी ग्राम पंचायतें और अन्य जरूरी स्थानीय निकाय क्षेत्र हैं, जहां से आयोग को महत्वपूर्ण जनसांख्यिकीय आंकड़े (Demographic Data) प्राप्त होना बाकी है।
जब तक इन 400 से अधिक पंचायतों से संबंधित सटीक प्रशासनिक आंकड़े और सामाजिक गणना की जानकारी आयोग को नहीं मिल जाती, तब तक ओबीसी आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट को फाइनल करके सरकार को नहीं सौंप सकेगा। इस रिपोर्ट के आने के बाद ही रोटेशन के आधार पर ओबीसी वर्ग के लिए सीटों का आरक्षण तय हो पाएगा।
स्थानीय निकाय और पंचायत चुनाव में हो रही इस देरी को लेकर जब राज्य सरकार के रुख के बारे में राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में मंथन हुआ, तो सरकार की ओर से पूरी तरह से सकारात्मक और स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने आई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार का कहना है कि वे प्रदेश में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को समय पर पूरा कराने के लिए पूरी तरह से वचनबद्ध हैं।
सरकार के आधिकारिक प्रतिनिधियों के अनुसार, राजस्थान में चुनाव के वास्तविक कार्यक्रम (Election Schedule) की घोषणा करना और आचार संहिता लागू करने की पूरी समय सारणी तय करना पूर्ण रूप से राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission) का अपना स्वतंत्र अधिकार क्षेत्र है। आयोग जब भी, जैसी भी परिस्थितियों में चुनाव का पूरा कार्यक्रम जारी करेगा, भजनलाल सरकार प्रदेश में शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और व्यवस्थित तरीके से मतदान संपन्न कराने के लिए आवश्यक सुरक्षा बल, बजटीय सहायता और प्रशासनिक मशीनरी सहित सभी जरूरी व्यवस्थाएं प्रदान करने के लिए पूरी तरह से मुस्तैद और तैयार है।
Updated on:
03 Jun 2026 10:02 am
Published on:
03 Jun 2026 09:42 am
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