22 जुलाई 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

epaper_icon

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

संपादकीय: स्पेन की जीत का ‘गणित’ नहीं उसका ‘रसायन’ समझिए

एक टीम खिलाडिय़ों का समूह भर नहीं है। यह वह अवस्था है जहां किसी एक की प्रतिभा, दूसरे के अहंकार से नहीं टकराती। जहां सबसे बड़ा खिलाड़ी भी उतनी ही निष्ठा और ऊर्जा से गोल बचाता है, जितनी उत्सुकता से वह विपक्षी खेमे में गोल करता है।
2 min read
Google source verification

जयपुर

image

Opinion Desk

Jul 22, 2026

spain win

spain win

इतिहास गवाह है कि खेलों में कुछ जीतें केवल ट्रॉफियां नहीं, बल्कि सफलता के अचूक सूत्र भी छोड़ जाती हैं। फुटबॉल विश्वकप-२०२६ का फाइनल केवल इसलिए याद नहीं रखा जाएगा कि स्पेन ने अर्जेंटीना को हराकर खिताब जीता, बल्कि इसलिए याद रखा जाएगा कि उसने सफलता के पुराने रसायन 'टीम भावना' पर भरोसा जताया है। आठ मैचों के इस महासमर में स्पेन ने 15 गोल दागे और उससे भी बड़ा चमत्कार यह रहा कि उसने पूरी प्रतियोगिता में केवल एक गोल खाया। 96 साल के विश्वकप इतिहास में किसी चैंपियन टीम का यह सबसे अभेद्य रक्षात्मक प्रदर्शन है। इटली के 37 मैचों के अजेय रेकॉर्ड को तोड़कर 38 मैचों तक अपराजेय रहना इस बात की घोषणा है कि सफलता की सबसे बड़ी कुंजी केवल व्यक्तिगत आक्रमण नहीं, बल्कि सामूहिक सामंजस्य है।

फुटबॉल की दुनिया अक्सर फॉरवर्ड खिलाडिय़ों और स्ट्राइकर्स के इर्द-गिर्द घूमती है, जो गोल दागकर रातों-रात नायक बन जाते हैं। स्पेन की टीम ने इस मिथक को तोड़ा है। टीम के कप्तान रोड्री कोई फॉरवर्ड नहीं, बल्कि एक मिडफील्डर हैं जो अकेले चमकने के बजाय पूरी टीम को खिलाते हैं, विपक्षी से गेंद छीनते हैं और खेल की लय तय करते हैं। जब दुनिया अर्जेंटीना जैसी टीमों में 'स्टार' खोज रही थी, स्पेन ने साबित किया कि इतिहास चाहे खिलाडिय़ों को या व्यक्तियों को सैल्यूट करता हो, सभ्यताओं का भविष्य आज भी 'टीम' ही लिखती है। एक टीम खिलाडिय़ों का समूह भर नहीं है। यह वह अवस्था है जहां किसी एक की प्रतिभा, दूसरे के अहंकार से नहीं टकराती। जहां सबसे बड़ा खिलाड़ी भी उतनी ही निष्ठा और ऊर्जा से गोल बचाता है, जितनी उत्सुकता से वह विपक्षी खेमे में गोल करता है। जहां व्यक्तिगत श्रेय का आकर्षण, सामूहिक दायित्व की गंभीरता के सामने छोटा हो जाता है। फुटबॉल का मैदान चाहे महज 105 मीटर लंबा होता हो, विश्व कप की ट्रॉफी भले ही हर चार वर्ष में किसी नए देश के पास चली जाती हो, लेकिन वहां से निकले सबक अक्सर दिशा देते हैं। अगर हम फुटबॉल के इस सामरिक दर्शन को खेल के मैदान से निकालकर जीवन और समाज के धरातल पर उतारें, तो पाएंगे कि आज मनुष्य का सबसे बड़ा संकट प्रतिभा की कमी नहीं, बल्कि सामंजस्य की कमी है। परिवारों में लोग योग्य हैं, लेकिन परस्पर सहयोग नहीं हैं। राष्ट्रों के पास अथाह संसाधन हैं, लेकिन ठीक प्रबंधन नहीं है।

स्पेन के इस अजेय सफर और रक्षण ने याद दिलाया है कि किसी भी व्यवस्था, समाज या राष्ट्र की पहली शर्त केवल असाधारण प्रतिभा नहीं, बल्कि परस्पर भरोसा है। जीवन के मैदान में भी अंतत: वही जीतता है, जो अपने 'मैं' को थोड़ा छोटा और सामूहिक 'हम' को थोड़ा बड़ा बना लेता है। भविष्य की दुनिया भी उन्हीं की होगी, जो मिलकर प्रकाश फैलाना सीखेंगे।