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Rajasthan Politics : मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने देशवासियों से मांगी सार्वजनिक माफ़ी, जानें किस बात से हैं आहत?

राजस्थान के स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा का बड़ा बयान। सिस्टम की विफलता मानते हुए छात्रों से मांगी व्यक्तिगत माफी। दोषियों को आस्तीन का सांप बताया।

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Minister Jhabar Singh Kharra Apology NEET Paper Leak Statement Rajasthan Update

Minister Jhabar Singh Kharra

देश की प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट (NEET) के पेपर लीक मामले को लेकर उपजा आक्रोश अभी थमा नहीं है। इसी बीच राजस्थान सरकार के नगरीय विकास व स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने इस मुद्दे पर सीधे तौर पर जिम्मेदारी स्वीकार करने वाला बयान दिया है, जो आम तौर पर राजनीतिक गलियारों में देखने को नहीं मिलता। बीकानेर दौरे पर आए मंत्री खर्रा ने पत्रकारों से बेबाक बातचीत करते हुए कहा कि नीट परीक्षा का लीक होना हमारे पूरे प्रशासनिक और परीक्षा नियामक सिस्टम का फेलियर था। खर्रा ने बेहद गंभीर लहजे में कहा कि जिन लोगों और अधिकारियों को इस अत्यंत गोपनीय और महत्वपूर्ण राष्ट्रीय परीक्षा को पूरी पारदर्शिता व सुचारू रूप से संपन्न कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, वे ही वास्तव में 'आस्तीन के सांप' साबित हुए। उन्होंने सिस्टम के भीतर बैठकर ही पेपर लीक के घिनौने खेल को अंजाम दिया, जिससे अपनी मेहनत के दम पर डॉक्टर बनने का सपना देख रहे देश के लाखों होनहार विद्यार्थियों के सुनहरे भविष्य के साथ बहुत बड़ा और दर्दनाक कुठाराघात हुआ है।

केंद्र और राज्य सरकार की ओर से मांगी माफी

बीकानेर के सर्किट हाउस में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने किसी भी प्रकार की लीपापोती करने के बजाय सीधे तौर पर जनता और युवाओं के दर्द को साझा किया। उन्होंने कहा कि एक जिम्मेदार पद पर होने के नाते, वे इस परीक्षा प्रक्रिया के दौरान अभ्यर्थियों को मानसिक रूप से हुई भारी परेशानी और अवसाद की स्थिति के लिए व्यक्तिगत तौर पर केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों की तरफ से सामूहिक रूप से देश के युवाओं से क्षमाप्रार्थी हैं।

मंत्री ने जांच एजेंसियों की प्रगति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य की एसओजी (SOG) और देश की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बेहद त्वरित और कड़े कदम उठाए हैं। दोषियों को चिन्हित कर लगातार गिरफ्तारियां की जा रही हैं और जांच की रफ्तार काफी तेज है।

उन्होंने राजस्थान और देश के युवाओं को पूरी तरह आश्वस्त करते हुए दोहराया कि सरकार अब इस बात को सुनिश्चित करने के लिए नए सुरक्षा प्रोटोकॉल पर काम कर रही है ताकि भविष्य में किसी भी स्तर पर ऐसी किसी भी घटना की पुनरावृत्ति न हो सके और युवाओं का देश की लोकतांत्रिक व संवैधानिक व्यवस्थाओं पर विश्वास फिर से बहाल हो सके।

विकास कार्यों को मिलेगी गति

प्रेस वार्ता के दौरान जब स्थानीय निकायों के विकास कार्यों और जनता से जुड़ी बुनियादी समस्याओं को लेकर सवाल पूछा गया, तो स्वायत्त शासन मंत्री ने शहरी विकास का एक नया व्यावहारिक दृष्टिकोण सामने रखा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राजस्थान के किसी भी शहरी या कस्बाई क्षेत्र का समग्र विकास और वहां की स्थानीय जनसमस्याओं का त्वरित समाधान तभी संभव है, जब हमारे नगर निगम, नगर परिषद और नगरपालिकाएं आर्थिक रूप से पूरी तरह आत्मनिर्भर और मजबूत होंगी।

झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि जब तक स्थानीय निकायों की वित्तीय स्थिति और उनके स्वयं के राजस्व के स्रोत बेहतर नहीं होंगे, तब तक वार्डों और मोहल्लों में होने वाले छोटे-बड़े विकास कार्यों को वांछित गति देना संभव नहीं है। सरकार का पूरा ध्यान इस समय निकायों के वित्तीय प्रबंधन को पारदर्शी बनाने, फिजूलखर्च रोकने और नई आय के संसाधन विकसित करने पर केंद्रित है, ताकि आमजन को मिलने वाली आधारभूत सुविधाओं जैसे सड़क, नाली, स्ट्रीट लाइट और सफाई व्यवस्था में बड़ा व गुणात्मक सुधार धरातल पर दिखाई दे सके।

निकाय और पंचायत चुनावों पर साफ किया रुख

राजस्थान में लंबे समय से चर्चा का विषय बने हुए आगामी पंचायतीराज और नगरीय निकाय चुनावों के टेंटेटिव शेड्यूल के संबंध में पूछे गए एक अत्यंत महत्वपूर्ण सवाल पर मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने सरकार का रुख पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया। उन्होंने कहा कि हमारे लोकतांत्रिक ढांचे में राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग (State OBC Commission) और राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission) दोनों ही पूरी तरह से स्वतंत्र, स्वायत्त और गरिमापूर्ण संवैधानिक संस्थाएं हैं।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में चुनाव की तारीखों का निर्धारण करना और चुनाव आचार संहिता लागू करना पूरी तरह से राज्य निर्वाचन आयोग के विशेष अधिकार क्षेत्र में आता है। सरकार इसमें दखल नहीं देती। वहीं दूसरी तरफ, स्थानीय निकायों और पंचायतों में पिछड़ा वर्ग (OBC) को उचित और वैधानिक राजनीतिक आरक्षण प्रदान करने के संबंध में देश के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) द्वारा जारी किए गए कड़े दिशा-निर्देशों की पालना सुनिश्चित की जा रही है। वर्तमान में राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग विभिन्न जिलों के आंकड़ों और सामाजिक समीकरणों का बारीकी से अध्ययन कर रहा है। आयोग की यह विस्तृत और अंतिम रिपोर्ट जैसे ही सरकार को प्राप्त होगी, उसके तुरंत बाद ही चुनाव की आगे की वैधानिक प्रक्रिया और तारीखों का रास्ता पूरी तरह से साफ हो जाएगा।

लापरवाही बरतने वालों को दी कड़ी चेतावनी

बीकानेर प्रवास के दूसरे दिन बुधवार की सुबह मंत्री झाबर सिंह खर्रा संभाग और जिला स्तर के सभी आला अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक लेने जा रहे हैं। इस बैठक से ठीक पहले उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और आम जनता की समस्याओं को लेकर अधिकारियों के ढीले रवैये पर कड़ा और सख्त रुख अख्तियार किया। अधिकारियों द्वारा आमजन की जनसुनवाई न करने और फाइलों को अटकाने संबंधी शिकायतों पर मंत्री अचानक उखड़ गए।

उन्होंने पत्रकारों और उपस्थित स्थानीय नागरिकों से सीधे संवाद करते हुए कहा, "आप मुझे स्पष्ट तौर पर बताइए कि बीकानेर या इस संभाग का कौन सा अधिकारी आपकी जायज समस्याओं को नहीं सुन रहा है और जनहित के कार्यों में लापरवाही बरत रहा है?"

उन्होंने आह्वान किया कि जनप्रतिनिधि और आम नागरिक अपनी समस्याओं को प्रामाणिक तथ्यों के साथ लिखित रूप में सीधे उनके सामने प्रस्तुत करें, संबंधित लापरवाह अधिकारियों से तुरंत जवाब-तलब किया जाएगा।

उन्होंने कड़े लहजे में अधिकारियों को चेतावनी देते हुए साफ कर दिया कि जनता के काम में किसी भी प्रकार की ढिलाई, भ्रष्टाचार या गड़बड़ी करने वाले प्रशासनिक अधिकारियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ तुरंत प्रभाव से सख्त अनुशासनात्मक व निलंबन की आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।