जयपुर

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की बड़ी कार्रवाई, RAS समेत 20 सेवा से बर्खास्त, 332 निलंबित, 17 की पेंशन बंद

राजस्थान में भ्रष्टाचार के खिलाफ भजनलाल सरकार का अब तक का सबसे बड़ा प्रशासनिक अभियान सामने आया है। मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत एक RAS अधिकारी समेत 20 अधिकारियों-कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त किया गया है, जबकि 332 को निलंबित और 17 की पेंशन बंद कर दी गई है।
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May 31, 2026
CM Bhajanlal
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा (फोटो-पत्रिका)

जयपुर। राजस्थान में भ्रष्टाचार, लापरवाही और अनुशासनहीनता के खिलाफ मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बड़ी कार्रवाई की है। सरकार ने साफ संकेत दिया है कि जनता के काम में बाधा डालने, पद का दुरुपयोग करने और भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत एक राजस्थान प्रशासनिक सेवा (आरएएस) अधिकारी सहित 20 अधिकारियों और कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त किया गया है, जबकि 332 अधिकारियों-कर्मचारियों को निलंबित किया गया है।

सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार भ्रष्टाचार और अनियमितताओं से जुड़े मामलों में 108 प्रकरणों में अभियोजन स्वीकृति जारी की गई है। इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के तहत 37 अन्य मामलों में भी कार्रवाई की गई है। वहीं 577 मामलों की जांच फिलहाल जारी है, जिनमें दोषियों की जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया चल रही है। सरकार का कहना है कि कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि दोषियों को कानूनी दायरे में लाने का काम भी लगातार किया जा रहा है।

इन अधिकारियों पर गिरी सबसे बड़ी गाज

सरकार की सख्ती का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जिन अधिकारियों को सेवा से हटाया गया है, उनमें एक आरएएस अधिकारी भी शामिल है। बर्खास्त किए गए अधिकारियों में आरएएस नरसिंह, उपनिदेशक डॉ. पी.आर. खींची, सहायक आचार्य डॉ. सुनील व्यास, प्रवक्ता प्रियंका दिवाकर, कृषि अधिकारी शीना लुकोश, चिकित्सा अधिकारी डॉ. संतोष कुमार, खनिज अभियंता अनिल खिमेसरा और लेखा सेवा के नरेंद्र तंवर सहित कई अधिकारी शामिल हैं। इसके अलावा विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों और चिकित्सा अधिकारियों पर भी कार्रवाई की गई है।

सेवानिवृत्ति के बाद भी नहीं मिलेगी राहत

भजनलाल सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि भ्रष्टाचार या गंभीर अनियमितताओं में शामिल अधिकारियों को सेवानिवृत्ति के बाद भी राहत नहीं मिलेगी। सरकार ने 17 अधिकारियों और कर्मचारियों की आजीवन शत-प्रतिशत पेंशन रोक दी है। इनमें आरएएस फतेह राय सोनी, अतिरिक्त निदेशक (खान) राकेश हीरात, आरपीएस ओमप्रकाश चंदोलिया और कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। कुछ मामलों में ग्रेच्युटी तक रोक दी गई है। सरकार का मानना है कि केवल सेवा के दौरान ही नहीं, बल्कि सेवानिवृत्ति के बाद भी जवाबदेही तय होनी चाहिए।

नौकरशाही में बढ़ी हलचल, अधिकारियों को सख्त संदेश

लगातार हो रही कार्रवाई के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि सरकारी नौकरी जनता की सेवा के लिए है, न कि व्यक्तिगत लाभ कमाने या जनता को परेशान करने के लिए। फाइलों को अनावश्यक रूप से रोकना, लोगों को कार्यालयों के चक्कर कटवाना, सरकारी धन का दुरुपयोग करना और जवाबदेही से बचना अब किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

आगे भी जारी रहेगा कार्रवाई का अभियान

राज्य सरकार ने संकेत दिए हैं कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। वर्तमान में 577 मामलों की जांच चल रही है, जबकि अखिल भारतीय सेवा के नौ अधिकारियों से जुड़े मामलों की भी पड़ताल की जा रही है। मुख्यमंत्री का कहना है कि प्रदेश में पारदर्शी, संवेदनशील और जवाबदेह प्रशासन स्थापित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि ईमानदारी और जवाबदेही के साथ काम करें, अन्यथा कठोर कार्रवाई के लिए तैयार रहें।

राजस्थान में हाल के वर्षों में भ्रष्टाचार और लापरवाही के मामलों पर इतनी व्यापक कार्रवाई पहली बार देखने को मिल रही है। सरकार इसे सुशासन और प्रशासनिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, जबकि नौकरशाही के लिए यह एक स्पष्ट चेतावनी मानी जा रही है कि अब कामकाज में ढिलाई या भ्रष्टाचार की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी जाएगी।

Updated on:
31 May 2026 11:06 pm
Published on:
31 May 2026 11:06 pm