इन दवाओं के संबंधित बैचों की बिक्री पर रोक लगा दी है और कंपनियों को बाजार से स्टॉक वापस लेने के सख्त निर्देश दिए हैं।
जयपुर। दवा बाजार में मरीजों की जान से खिलवाड़ का बड़ा मामला सामने आया है। औषधि नियंत्रण विभाग की जांच में बाजार में धड़ल्ले से बिक रही 8 नामी दवाओं के सैंपल मानक गुणवत्ता पर खरे नहीं उतरे हैं। विभाग ने तुरंत एक्शन लेते हुए इन दवाओं के संबंधित बैचों की बिक्री पर रोक लगा दी है और कंपनियों को बाजार से स्टॉक वापस लेने के सख्त निर्देश दिए हैं।
दवा नियंत्रण विभाग ने 16 फरवरी से 28 फरवरी 2026 के बीच प्रदेशभर में विशेष जांच अभियान चलाया था। इस दौरान विभिन्न दवा दुकानों और स्टॉकर्स से दवाओं के रैंडम सैंपल लिए थे। जांच रिपोर्ट आने के बाद आयुक्तालय के औषधि नियंत्रक प्रथम अजय फाटक और औषधि नियंत्रक द्वितीय मनोज धीर ने इन दवाओं को 'नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी' घोषित कर दिया। विभाग ने औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के तहत इन दवाओं के खिलाफ प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए हैं।
जांच में सबसे चौंकाने वाले नतीजे दर्द निवारक और बुखार की दवाओं में मिले हैं। प्रसिद्ध दवा इबुप्रोफेन व पैरासिटामोल (इबुकोम) के सैंपल में टैबलेट के आपस में चिपकने और समय से पहले टूटने जैसी गंभीर खामियां मिलीं। वहीं, पैरासिटामोल 650 एमजी की टेबलेट 'डिसॉल्यूशन टेस्ट' (घुलनशीलता परीक्षण) में फेल हो गई। इसका मतलब है कि यह दवा शरीर में जाने के बाद सही तरीके से घुल ही नहीं रही थी, जिससे मरीज को आराम मिलना नामुमकिन था।
सर्दी-खांसी के मौसम में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली एम्ब्रोक्सोल हाइड्रोक्लोराइड, टर्बुटालाइन व गुआइफेनेसिन सिरप के दो अलग-अलग बैच फेल पाए गए हैं। परीक्षण में पाया गया कि इसमें 'एम्ब्रोक्सोल' की मात्रा निर्धारित मानक से काफी कम थी। इसी तरह, जोड़ों के दर्द में दी जाने वाली एसेक्लोफेनाक व पैरासिटामोल (पीएएस) टैबलेट के रंग परीक्षण में गड़बड़ी मिली, इसमें प्रतिबंधित 'सनसेट येलो' की मौजूदगी पाई गई।
विभाग की लिस्ट में केवल टेबलेट ही नहीं, बल्कि पाउडर और सिरप भी शामिल हैं। त्वचा के संक्रमण और घावों के लिए इस्तेमाल होने वाला प्रोपोक्सुर सल्फानिलामाइड व सेट्रिमाइड पाउडर भी मानकों पर खरा नहीं उतरा। इसमें मुख्य तत्व 'प्रोपोक्सुर' की मात्रा सही नहीं थी। वहीं, घबराहट और एलर्जी की दवा हाइड्रोक्सीजीन हाइड्रोक्लोराइड (प्रोनेक्ट-25) अस्से परीक्षण में फेल हो गई।
डीसीओ अजय फाटक ने बताया कि मरीजों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। जिन कंपनियों के सैंपल फेल हुए हैं, उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। विभाग अब इन कंपनियों के अन्य बैचों की भी रैंडम जांच करेगा। दवा विक्रेताओं को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि यदि प्रतिबंधित बैच की कोई भी दवा काउंटर पर मिली, तो उनका लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा।
इबुप्रोफेन व पैरासिटामोल टैबलेट (इबुकोम)
एम्ब्रोक्सोल हाइड्रोक्लोराइड, टर्बुटालाइन सल्फेट व गुआइफेनेसिन सिरप
एसेक्लोफेनाक व पैरासिटामोल (पीएएस) टैबलेट
प्रोपोक्सुर सल्फानिलामाइड व सेट्रिमाइड पाउडर
हाइड्रोक्सीजीन हाइड्रोक्लोराइड एसआर 25 एमजी (प्रोनेक्ट-25)
पैरासिटामोल टैबलेट आईपी 650 एमजी
औषधि नियंत्रक प्रथम अजय फाटक ने बताया कि दवाओं पर क्यूआर कोड होता है। जिससे आम आदमी क्यूआर कोड से दवाओं के बारे में जानकारी ले सकता है। यह मालूम कर सकता है कि दवाएं असली है या नकली। वहीं दवा की गुणवत्ता की जांच लैब में होती है। जिसके बाद घटिया दवा होने पर अलर्ट जारी किया जाता है।