जयपुर

उदयपुर-भरतपुर में रहा भाजपा का दबदबा, बीकानेर में फिफ्टी-फिफ्टी

दोनों प्रमुख दलों के लिए तीनों नगर निगम में बोर्ड बनाना चुनौती
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Nov 08, 2019
उदयपुर-भरतपुर में रहा भाजपा का दबदबा, बीकानेर में फिफ्टी-फिफ्टी
उदयपुर-भरतपुर में रहा भाजपा का दबदबा, बीकानेर में फिफ्टी-फिफ्टी

जया गुप्ता ञ्च जयपुर. राज्य में 6 से बढ़ाकर 9 नगर निगम कर दिए गए हैं। हालांकि इस महीने चुनाव केवल 3 नगर निगम (उदयपुर, भरतपुर और बीकानेर) में हैं लेकिन नगर पालिकाओं और नगर परिषदों से इतर नगर निगमों में बोर्ड बनाना दोनों दलों के चुनौती ही होगा।
तीनों जिलों में दोनों दलों के लगभग 9 नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर है। तीन में से 2 नगर निगम अभी तक कांग्रेस के लिए अभेद्य किला साबित हुए हैं। वहीं बीकानेर में हर 5 साल में तख्तापलट हुआ है। निकाय चुनाव में तीनों ही जिलों में कई बड़े नेता सक्रिय हैं। उम्मीदवारों को टिकट देने के साथ रणनीति तैयार करने में इनकी भूमिका अहम मानी जा रही है लेकिन आपसी खींचतान हर जगह दिखाई दे रही है। टिकट नहीं मिलने से कई दावेदार बागी होकर संगठन के सामने खड़े हुए हैं। ऐसे में भाजपा के लिए जहां अपना रेकॉर्ड बनाए रखना आसान नहीं होगा, वहीं कांग्रेस को सेंध लगाने में मुश्किलें झेलनी पड़ेंगी।
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किस नगर निगम में क्या स्थिति
- उदयपुर : यहां पहले नगर परिषद और अब नगर निगम में पिछले 25 वर्षों में एक बार भी कांग्रेस का बोर्ड नहीं बन पाया। भाजपा का एकतरफा दबदबा रहा है। पूर्व मंत्री व भाजपा नेता किरण माहेश्वरी पहली सभापति थीं। अब उन्होंने राजसमंद को अपना कार्यक्षेत्र बना लिया है। उदयपुर में भाजपा की ओर से नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया और कांग्रेस की ओर से पूर्व मंत्री गिरिजा व्यास सक्रिय हैं।
- बीकानेर : यहां 3 बार भाजपा का बोर्ड बना और 2 बार कांग्रेस का, लेकिन वर्ष 2004 में बना भाजपा का बोर्ड बीच में ही भंग हो गया और 2006 में कांग्रेस का बोर्ड अस्तित्व में आया। ऐसे में दोनों दल बराबरी पर हैं। वर्तमान में जिले से बीडी कल्ला व भंवर सिंह भाटी मंत्री हैं। हालांकि बीकानेर शहर विधायक और कल्ला ही विशेष सक्रिय हैं। भाजपा से बीकानेर सांसद व केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल, पूर्व मंत्री सुरेंद्र पाल सिंह ने कमान संभाल रखी है। भाजपा से मंत्री रहे देवीसिंह भाटी ने संगठन से इतर 48 उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं।
- भरतपुर : यहां कांग्रेस आज तक अपना बोर्ड नहीं बना पाई। निकाय चुनाव को संवैधानिक मंजूरी मिलने से लेकर आज तक भाजपा का ही बोर्ड रहा है। हालांकि 2009 में प्रत्यक्ष रीति से हुए चुनाव में निर्दलीय सभापति बनी थीं। तब भी भाजपा के पार्षद अधिक थे। अभी जिले में कांग्रेस से विश्वेंद्र सिंह, भजनलाल जाटव और आरएलडी से सुभाष गर्ग मंत्री हैं। भाजपा में पूर्व विधायक ने जिम्मा संभाल रखा है। सूत्रों के अनुसार यहां भाजपा के साथ संघ भी सक्रिय है।

Published on:
08 Nov 2019 05:00 am